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बिना किसी समय सीमा के चुनाव में देरी करना मौजूदा कानून नियमों का स्पष्ट उल्लंघन: पार्षदों की शिकायत

November 6, 2023

बिना किसी समय सीमा के चुनाव में देरी करना मौजूदा कानून नियमों का स्पष्ट उल्लंघन: पार्षदों की शिकायत

श्रीनगर/जम्मू: जम्मूकश्मीर में जैसे ही शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के लिए स्लॉग ओवर शुरू हो गए हैं। पार्टी से ऊपर उठकर पार्षदों की शिकायत है कि बिना किसी समय सीमा के चुनाव में देरी करना मौजूदा कानून नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। यूएलबी का कार्यकाल समाप्त होने के तुरंत बाद, मेयर, डिप्टी मेयर, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अपनी शक्ति खो देंगे। उनके पास निहित शक्तियां आयुक्तों (जेएमसी और एसएमसी के मामले में) और नगर परिषदों और समितियों के मामले में प्रशासकों या कार्यकारी अधिकारियों को हस्तांतरित हो जाएंगी।

यूएलबी (और बाद में यहां तक कि पंचायतों) की शर्तों की समाप्ति के बाद, लोग सरकार के साथ सीधा संपर्क खो देंगे। निर्वाचित प्रतिनिधि जनता और सरकार के बीच सीधे संपर्क जोड़ रहे हैं। सभी के लिए मुख्य परेशान करने वाला मुद्दा सरकार (चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार एजेंसियां) द्वारा चुनाव के सटीक कार्यक्रम की तुलना में दिया जा रहा स्मोकस्क्रीन प्रभाव है। 74वें संवैधानिक संशोधन के प्रावधानों के अनुसार दोनों निगमों सहित यूएलबी की शर्तों की समाप्ति से पहले चुनाव आयोजित किए जाने चाहिए थे।

उनका कहना है कि ओबीसी को आरक्षण सुनिश्चित करने और सभी विसंगतियों को दूर करने के लिए पूर्ण परिसीमन के लिए चुनाव में देरी की जा रही है। मेरा सवाल है-जब सरकार जम्मूकश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 लेकर आई, तो उन्होंने सभी आवश्यक कार्य किए, ऐसा क्यों नहीं किया गया। इन प्रक्रि याओं को पूरा करने के लिए उनके पास तीन साल का समय है। वे तब ऐसा कर सकते थे जब महिलाओं और एससी/एसटी के लिए आरक्षण और वार्डों के रोटेशन से संबंधित अभ्यास किया गया था।

इसलिए इसे मतदान में देरी के बहाने के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। मेरे लिए यह केवल लोगों को सभी निर्वाचित इंटरफेस के अवशेषों से वंचित करना है। यह बात श्रीनगर नगर निगम (एसएमसी) के उपमहापौर परवेज अहमद कादरी ने कहीं। उनका तर्क है अगर सरकार को कुछ संशोधन करने होते तो उनके पास निगमों को भंग करने का विकल्प होता। उस स्थिति में कम से कम हमें इस बात से तसल्ली होती कि छह महीने के भीतर चुनाव करा लिए जाते, लेकिन अब हमारे पास कोई सुराग नहीं है।

नगरसेवक के रूप में हमें भी इन मुद्दों पर पहले ही विचार करना चाहिए था: डिप्टी मेयर बिलोरिया
जम्मू नगर निगम (जेएमसी) के उपमहापौर बलदेव सिंह बिलोरिरया परिसीमन और ओबीसी आरक्षण के लिए चुनाव में देरी के सरकार के फैसले में सीधे तौर पर गलती नहीं पाते हैं। सभी को न्याय सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी था। निर्णय में देरी हो रही है, लेकिन मुझे लगता है कि नगरसेवक के रूप में हमें भी इन मुद्दों पर पहले ही विचार करना चाहिए था। फिर भी इस अभ्यास के पूरा होने के बाद लोगों को उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों को जमीनी स्तर पर लोकतंत्र के साथ सही भावना देने के लिए तुरंत चुनाव कराया जाना चाहिए, जिसके लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है।

चुनाव जल्द से जल्द कराया जाना चाहिए: पार्षद चोपड़ा
जेएमसी में वार्ड नंबर 28 का प्रतिनिधित्व करने वाले डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) के पार्षद गौरव चोपड़ा भी इसी तरह की भावना व्यक्त करते हैं कि चुनाव जल्द से जल्द कराया जाना चाहिए। हालांकि वह एक चुभता हुआ अवलोकन भी करते हैं। सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करते समय कहा था कि यह जम्मूकश्मीर में 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों को लागू करने में एक बाधा थीÑ लेकिन इसे लागू करने के बाद, वे इस प्रक्रि या में ढिलाई बरत रहे हैं यह निराशाजनक है।

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