जम्मू-कश्मीर में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस अध्यादेश पर ब्रेक, कैबिनेट ने मांगा और स्पष्टीकरण
August 6, 2026
Ease of Doing Business Ordinance : श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में कारोबार को आसान बनाने और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाया जा रहा ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ अध्यादेश फिलहाल टल गया है। कैबिनेट बैठक में कुछ मंत्रियों ने प्रस्तावित सुधारों के प्रावधानों पर विस्तृत जानकारी मांगी, जिसके बाद सरकार ने इसे आगे की प्रक्रिया के लिए रोक दिया। अब प्रेजेंटेशन के बाद इसे दोबारा मंजूरी के लिए पेश किया जा सकता है या सितंबर में होने वाले विधानसभा सत्र में बिल के रूप में लाया जा सकता है।
अध्यादेश पर कैबिनेट में सहमति नहीं
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाले कानून, न्याय और संसदीय कार्य विभाग द्वारा तैयार किए गए इस अध्यादेश को हाल ही में कैबिनेट की बैठक में पेश किया गया था। लेकिन इसे मंज़ूरी नहीं मिल सकी क्योंकि कुछ मंत्रियों ने प्रस्तावित कानून के विभिन्न पहलुओं पर और स्पष्टीकरण मांगा था। अगर ज़रूरी प्रेजेंटेशन जल्द पूरी हो जाती है, तो मंज़ूरी के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पास भेजने से पहले कैबिनेट से इसे ‘सर्कुलेशन’ के ज़रिए मंज़ूरी मिल सकती है। हालाँकि, अगर प्रक्रिया में देरी होती है, तो सरकार सितंबर में होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान इन सुधारों को एक बिल के तौर पर पेश कर सकती है।
NOC-इंस्पेक्शन में कटौती और 3 साल की छूट का प्रस्ताव
प्रस्तावित अध्यादेश का मकसद कारोबारी माहौल में बड़े सुधार लाना है। इसके तहत नियमों के पालन की शर्तों को काफ़ी कम करना, मंज़ूरी की प्रक्रियाओं को आसान बनाना, गैर-ज़रूरी ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) को कम से कम करना, खुद से सर्टिफ़िकेशन (सेल्फ़-सर्टिफ़िकेशन) को बढ़ावा देना और कई विभागों द्वारा बार-बार किए जाने वाले निरीक्षणों पर रोक लगाना शामिल है। प्रस्तावित सुधारों की एक अहम विशेषता कई प्रक्रियागत औपचारिकताओं के पालन पर तीन साल की छूट (मोरेटोरियम) देना है। इससे उद्यमियों को कुछ गैर-ज़रूरी औपचारिकताओं को पूरा करने से पहले ही कारोबार शुरू करने और चलाने की इजाज़त मिलेगी। इस पहल का मकसद होटल, होम-स्टे, शिक्षण संस्थान, स्वास्थ्य सेवा केंद्र और अन्य व्यावसायिक उपक्रमों जैसे क्षेत्रों के लिए मंज़ूरी की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना भी है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि निरीक्षण रिपोर्ट तय समय-सीमा के भीतर जारी की जाएं।