
Farooq Urges Unity to Protect Rights, Warns of Existential Threat : श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने बारामूला में कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए लोगों से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर कठिन दौर से गुजर रहा है और बदलाव के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। फारूक ने केंद्र सरकार पर राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए युवाओं से क्षेत्र के इतिहास को समझने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “हम अब तक खत्म हो चुके होते, लेकिन साहस रखने और मुकाबला करने की वजह से ही हम टिके हुए हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि बदलाव अपने आप आ जाएगा; अपने अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हम देश के खिलाफ नहीं जाना चाहते, लेकिन हम उन्हें (हमारे पड़ोसियों को) बताना चाहते हैं कि वे खुद को बदलें।” नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र ने परिसीमन और चुनावों के बाद राज्य का दर्जा (statehood) बहाल करने का वादा किया था, लेकिन यह वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा, “हम कठिन दौर से गुजर रहे हैं। दिल्ली में हमसे वादा किया गया था कि परिसीमन और चुनावों के बाद राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, लेकिन ऐसा कहीं होता नहीं दिख रहा है।” डॉ. फारूक ने लोगों से धार्मिक और सांप्रदायिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए एकता बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, “शासक आते-जाते रहते हैं। वे जुल्म करते हैं, लेकिन यह जुल्म हमेशा नहीं रहता।” उन्होंने युवाओं के बीच जम्मू-कश्मीर के इतिहास को लेकर जागरूकता की कमी पर भी चिंता जताई और उनसे आग्रह किया कि वे इस क्षेत्र के अतीत और उन परिस्थितियों को समझें जिन्होंने इसकी राजनीतिक यात्रा को आकार दिया है।
उन्होंने कहा, “हमने कभी यह नहीं कहा कि हम भारतीय नहीं हैं, लेकिन हम बार-बार यही कहते रहे हैं कि हम गांधी के भारत, नेहरू के भारत से जुड़े हैं।” डॉ. फारूक ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि भाजपा के साथ उनके गठबंधन के कारण ही 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म हुआ।
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