पुंछ। जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी जिलों में अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही हुई है, जिसमें कम से कम दस लोगों की मौत हो गई और कई लोग लापता हैं।
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पुंछ जिले की सुरनकोट तहसील के बुफलियाज इलाके में अचानक आई बाढ़ की चपेट में आने से 10 लोगों की मौत हो गई। सुरनकोट के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. मोहम्मद यूसुफ चौधरी ने बताया कि अब तक आठ शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि अन्य लोग अभी भी लापता हैं। घटनास्थल पर खोज और बचाव अभियान चल रहा है। मरने वाले दस लोगों में से आठ की पहचान कर ली गई है।
नूर सफिया (59), सज्जाद अहमद (16), हकनवाज अहमद (10), शाहनवाज अहमद (10), खालिदा कौसर (25), सोफयान (2), बानो बी (60) और मोहम्मद अकरम (7) की मौत हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि पुंछ जिले के कई बाढ़ प्रभावित इलाकों में बिजली के खंभे उखड़ गए और मोबाइल नेटवर्क सेवाएं बाधित हो गईं। पुलिस, सिविल प्रशासन और स्थानीय लोग मौके पर मौजूद हैं। अधिकारियों ने बताया कि मुगल रोड और राजौरी-पुंछ हाईवे पर ट्रैफिक जारी है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पुंछ में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से हुई मौतों पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स, पुलिस और अन्य सभी संबंधित एजेंसियां बचाव व राहत कार्यों में पूरी तरह से जुटी हुई हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रभावित परिवारों तक बिना किसी देरी के हरसंभव मदद पहुंचाई जाए।
वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), श्रीनगर की ओर से जारी चेतावनी के अनुसार, 19 जुलाई से 23 जुलाई तक श्रीनगर जिले समेत पूरे जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम और भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। इसे देखते हुए सभी निवासियों को बहुत सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आम जनता, खासकर फकीर गुजरी, उसके आस-पास के इलाकों और खोनमोह में रहने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि जब तक मौसम ठीक न हो जाए, वे पहाड़ी ढलानों, भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की आशंका वाले इलाकों या जलाशयों के पास न जाएं।
पर्यटकों और स्थानीय शिकारा चलाने वालों को सलाह दी गई है कि मौसम की चेतावनी के दौरान डल झील और नागिन झील में अपनी सभी गतिविधियां रोक दें। इसी तरह, झेलम नदी और अन्य जलाशयों के किनारे रेत निकालने का काम करने वालों को सख्त सलाह दी गई है कि मौजूदा स्थिति और जल स्तर की जांच किए बिना नदी पार करने या रेत निकालने का कोई भी काम न करें।
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