श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में मौसमी इन्फ्लूएंजा के टीकों की देरी से आपूर्ति को लेकर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने चिंता जताई है। कर्मचारियों का कहना है कि टीकाकरण अभियान अक्टूबर के पहले सप्ताह में शुरू हो जाना चाहिए, लेकिन टीके देर से पहुँचने के कारण अभियान प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से टीकों की खरीद और वितरण व्यवस्था की समीक्षा कर समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि मौसमी संक्रमण के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहले से तैयार रहें।
कर्मचारियों ने ‘कश्मीर न्यूज़ ट्रस्ट’ को बताया कि अक्टूबर का पहला सप्ताह मौसमी इन्फ्लूएंजा टीकाकरण शुरू करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसलिए, स्वास्थ्य केंद्रों तक टीके समय पर पहुँचने चाहिए ताकि स्वास्थ्यकर्मी बिना किसी देरी के टीकाकरण शुरू कर सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि टीके अक्सर अक्टूबर का महीना काफी आगे निकल जाने के बाद पहुँचते हैं, जिससे समय पर टीकाकरण करने के लिए बहुत कम समय बचता है। उनका कहना है कि चिंता सिर्फ टीकों के पहुँचने की ही नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने की है कि ज़रूरत पड़ने पर टीके लगाने के लिए स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह तैयार हों।
कर्मचारियों ने कहा कि टीकाकरण की योजना बनाने, पात्र लोगों को सूचित करने और टीकाकरण प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए टीकों की समय पर आपूर्ति बहुत ज़रूरी है। मौसमी इन्फ्लूएंजा सांस से जुड़ी एक बीमारी है, जो गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। यह विशेष रूप से बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है। टीकाकरण इससे बचाव का एक अहम उपाय है। हालाँकि, टीकाकरण अभियान का समय स्थानीय महामारी विज्ञान के पैटर्न, टीकों की उपलब्धता और स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक सलाह पर निर्भर कर सकता है।
कर्मचारियों ने चिंता जताई कि आपूर्ति में देरी से टीकाकरण अभियान समय पर लागू नहीं हो पाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से टीकों की खरीद और वितरण प्रक्रिया की समीक्षा करने की अपील की है। उनका कहना है कि टीके टीकाकरण शुरू होने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले ही स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँच जाने चाहिए। कर्मचारियों ने कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि टीकों की आपूर्ति का शेड्यूल, टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार हो, ताकि जब टीकाकरण शुरू करने का समय आए, तो स्वास्थ्य केंद्रों को टीकों का इंतज़ार न करना पड़े।

