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एकता और सेवा का संदेश देता है हरबाह उत्सव : LG सिन्हा

Harbah Festival: A Message of Unity : श्रीनगर। लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने शनिवार को अनंतनाग के तीर्थराज लोक भवन में आयोजित वार्षिक हरबाह उत्सव में भाग लिया। वहाँ उन्होंने माता सिद्ध लक्ष्मी के दर्शन किए और पवित्र वार्षिक हवन में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। लेफ्टिनेंट गवर्नर ने इस उत्सव को आस्था, कृतज्ञता और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक बताया और लोगों से करुणा, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा के मूल्यों को मजबूत करने का आग्रह किया। सभा को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट गवर्नर ने कहा कि अनंतनाग के शांत वातावरण में स्थित यह पवित्र तीर्थस्थल भारत की चिरस्थायी आध्यात्मिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है और सत्य, धर्म व करुणा के शाश्वत आदर्शों से पीढ़ियों को प्रेरित करता रहता है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र स्थान का हर पहलू सनातन संस्कृति की समृद्ध आध्यात्मिक चेतना को दर्शाता है, जिसने सदियों से सत्य, करुणा और धर्म के सिद्धांतों के माध्यम से मानवता का मार्गदर्शन किया है। तीर्थस्थल के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए सिन्हा ने याद दिलाया कि ऐतिहासिक रूप से इस स्थान को ‘लोकपुण्य’ के नाम से जाना जाता था, जिसका उल्लेख कल्हण की ‘राजतरंगिणी’ में मिलता है। उन्होंने कहा कि हरबाह उत्सव के दौरान आयोजित पारंपरिक हवन और ध्वजारोहण समारोह भक्ति, त्याग, धैर्य, सामाजिक सद्भाव और जनसेवा के मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं। आधुनिक समाज की चुनौतियों का जिक्र करते हुए लेफ्टिनेंट गवर्नर ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में तेजी से हुई प्रगति ने दुनिया को करीब तो लाया है, लेकिन साथ ही इसने अकेलेपन, सामाजिक विभाजन और भावनात्मक तनाव को भी बढ़ाया है। उन्होंने जोर दिया कि शांतिपूर्ण, समृद्ध और समावेशी समाज के निर्माण में व्यक्तियों और संस्थानों दोनों के लिए आध्यात्मिक मूल्य ही मार्गदर्शक शक्ति होने चाहिए। उन्होंने कहा, “हरबाह उत्सव हमें याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति मानवता की सेवा, आपसी सम्मान और निस्वार्थ प्रेम के माध्यम से व्यक्त होती है।” लेफ्टिनेंट गवर्नर ने समाज के लिए तीन महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्वास और समृद्धि को मजबूत करने के लिए व्यक्तिगत और संस्थागत आचरण को नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि आज की तेज-तर्रार जीवनशैली में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण के माध्यम से युवाओं में जिम्मेदारी की मजबूत भावना विकसित करने का भी आह्वान किया। जम्मू-कश्मीर की युवा पीढ़ी से अपील करते हुए सिन्हा ने उनसे आग्रह किया कि वे न केवल आधुनिक शिक्षा से जुड़े रहें, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं से भी जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि सच्चा ज्ञान विनम्रता से मिलता है और इसकी सबसे बड़ी ताकत दूसरों की सेवा दया और ईमानदारी से करने में है।
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