श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने शुक्रवार को हाल ही में वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद की ओर से पारित संशोधनों को मंजूरी प्रदान कर दी। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का अधिनियम संख्या वी) में संशोधन के लिए सदन में विधेयक पेश किया। विधेयक पर सदन में चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक पवन गुप्ता ने कुछ सुधारों का सुझाव देते हुए कहा कि यह विधेयक मौजूदा सुधारों के एक हिस्से के रूप में पेश किया गया है। साल 2017 में पेश किए गए जीएसटी कानून का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समय के साथ कई संरचनात्मक परिवर्तन लागू किए गए हैं।
गुप्ता को मुख्यमंत्री ने बीच में टोकते हुए कहा कि विधानसभा के पास इस विधेयक पर सीमित अधिकार हैं, क्योंकि यह एक संघीय अधिनियम है। उन्होंने कहा कि जीएसटी ढांचे में किसी भी सुधार को राज्य विधानसभा में अनुमोदन के लिए लाए जाने से पहले जीएसटी परिषद द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि जो सदस्य पहले वित्त राज्य मंत्री रह चुके हैं, इस अधिनियम से अच्छी तरह वाकिफ हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक संघीय अधिनियम है। इस विधानसभा में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। इसमें किसी भी सुधार को जीएसटी परिषद द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है।
जिन संशोधनों पर चर्चा हो रही है, उन्हें परिषद द्वारा पहले ही मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने कहा, मैं जो सदन के समक्ष रख रहा हूँ, उसे जीएसटी परिषद द्वारा अनुमोदित किया जा चुका है। यह केवल अनुमोदन के लिए यहाँ आया है। इस दौरान उन्होंने सदस्यों से विधेयक को तदनुसार अनुमोदित और पारित करने का आग्रह किया। इसके बाद गुप्ता कहा कि वह उन सुधारों की बात कर रहे थे जो राज्य द्वारा किए जाने हैं। उन्होंने कहा, हम केंद्रीय अधिनियम को चुनौती नहीं दे रहे हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि इस स्तर पर अधिनियम में संशोधन नहीं किया जा सकता और विधेयक पारित किया जाना चाहिए। इसके बाद विधानसभा ने ध्वनिमत से विधेयक पारित कर दिया।

