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Jammu Kashmir Weather: कश्मीर घाटी में तापमान में सुधार, गुलमर्ग में पारा पहुंचा -2 डिग्री

Snowfall

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जम्मू कश्मीर डेस्क। कश्मीर घाटी में मौसम को लेकर राहत भरी खबर है। गुलमर्ग को छोड़कर पूरी घाटी में रात के तापमान में सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि, आने वाले दिनों में मौसम फिर से करवट ले सकता है, क्योंकि मौसम विभाग ने 31 दिसंबर से ताजा बर्फबारी की संभावना जताई है। ऐसे में एक बार फिर ठंड बढ़ने की आशंका है।

श्रीनगर में रात का न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज

जानकारी के अनुसार, श्रीनगर में रात का न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तापमान में इस बढ़ोतरी से आम जनजीवन को कुछ राहत मिली है। दूसरी तरफ, गुलमर्ग में ठंड का असर अब भी बना हुआ है। यहां रात का तापमान माइनस 2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इससे क्षेत्र में कड़ाके की ठंड जारी है।

इससे पहले रविवार को श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 0.8 डिग्री सेल्सियस, गुलमर्ग में माइनस 2.2 और पहलगाम में माइनस 1.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं, जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान 8.1 डिग्री सेल्सियस, कटरा में 8.2, बटोटे में 6.9, बनिहाल में 4.5 और भद्रवाह में 1.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

30 दिसंबर से 1 जनवरी तक बारिश की संभावना

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, सोमवार तक बादल छाए रहने का अनुमान लगाया है। विभाग के अनुसार, 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक हल्की बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। 31 दिसंबर और 1 जनवरी को कई जगहों पर हल्की बारिश/बर्फबारी और कश्मीर घाटी के मध्य और उत्तरी हिस्सों में मध्यम बर्फबारी होने की उम्मीद है।

स्थानीय रूप से ‘चिल्लई कलां’ के नाम से जाना जाने वाला 40 दिनों का कड़ाके की ठंड का दौर 21 दिसंबर को शुरू हुआ है; यह 30 जनवरी को खत्म होगा। चिल्लई कलां में होने वाली भारी बर्फबारी ही पहाड़ों में जम्मू-कश्मीर के बारहमासी पानी के जलाशयों को भरती है। ये बारहमासी जलाशय गर्मियों के महीनों में कई नदियों, झरनों और झीलों को पानी देते हैं। चिल्लई कलां के दौरान बर्फबारी न होना एक आपदा है, क्योंकि यह गर्मियों के महीनों में सूखे का संकेत देता है।

बर्फबारी का बेसब्री से इंतजार कर रहे लोग

इसलिए, लोग बर्फबारी का बेसब्री से इंतजार करते हैं। चूंकि इन दिनों नए साल की शाम मनाने वाले लोग घाटी में आ रहे हैं, इसलिए श्रीनगर, गुलमर्ग और पहलगाम के सभी होटल पूरी तरह से बुक हो चुके हैं। लोग अपनी छुट्टियों को यादगार बनाने के लिए नए साल की शाम को अच्छी बर्फबारी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

कश्मीर के बड़े-बुजुर्गों को आज भी चिल्लई कलां की वो लंबी रातें याद हैं, जब वे सुबह उठकर बाहर भारी बर्फबारी देखते थे। छत के किनारों से लटकती बर्फ की बूंदें एक इंद्रधनुषी नजारा बनाती थीं, क्योंकि उन बूंदों से गुजरने वाली सूरज की रोशनी अलग-अलग रंगों में बंट जाती थी। उन दिनों भारी बर्फबारी से सड़कें कई दिनों तक बंद रहती थीं, और स्थानीय लोग अपने घरों में उगाई गई सब्जियों, हर घर में मौजूद छोटी मुर्गियों के अंडों और खुद पाली हुई गाय के दूध पर निर्भर रहते थे।

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