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जम्मू-कश्मीर : गुलमर्ग और पहलगाम में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे गिरा, श्रीनगर में बढ़ा

December 24, 2025

जम्मू-कश्मीर : गुलमर्ग और पहलगाम में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे गिरा, श्रीनगर में बढ़ा

जम्मू-कश्मीर डेस्क। जम्मू और कश्मीर में बुधवार को श्रीनगर शहर में रात का तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से ऊपर रहा, जबकि गुलमर्ग और पहलगाम हिल स्टेशनों पर यह शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया।

मौसम विभाग ने बताया कि श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस था, जबकि गुलमर्ग और पहलगाम में यह क्रमशः माइनस 4.2 और माइनस 2.2 डिग्री था। जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान 8.2 डिग्री सेल्सियस, कटरा शहर में 9.4, बटोटे में 4.2, बनिहाल में 6.4 और भद्रवाह में 0.6 डिग्री रहा।

मौसम विभाग ने केंद्र शासित प्रदेश में 31 दिसंबर तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान लगाया है और कहा है कि साफ आसमान के कारण न्यूनतम तापमान में गिरावट आ सकती है। कड़ाके की ठंड का 40 दिन का समय जिसे ‘चिल्लई कलां’ कहा जाता है, 21 दिसंबर को एक अच्छी शुरुआत के साथ शुरू हुआ, क्योंकि घाटी के सभी ऊंचे इलाकों में बहुप्रतीक्षित बर्फबारी हुई, जबकि मैदानी इलाकों में बारिश हुई। इस बारिश ने 3 महीने के सूखे को खत्म कर दिया, जिससे घाटी में समस्याएं पैदा हो गई थीं, क्योंकि ज्यादातर लोगों ने सर्दी, फ्लू और सीने से संबंधित बीमारियों की शिकायत की थी।

बारिश और बर्फबारी ने होटल मालिकों, टूर और ट्रैवल ऑपरेटरों और पर्यटन उद्योग से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े अन्य लोगों में भी उम्मीद जगाई है। ये लोग अब क्रिसमस और नए साल की पूर्व संध्या पर गुलमर्ग और अन्य हिल स्टेशनों पर पर्यटकों के आने का इंतजार कर रहे हैं। स्कीयरों के भी गुलमर्ग आने की उम्मीद है क्योंकि यह रिसॉर्ट अपनी शानदार स्की ढलानों के कारण ‘स्कीयरों के स्वर्ग’ के रूप में जाना जाता है।

सैकड़ों-हजारों प्रवासी पक्षी सर्दियों के दौरान घाटी के गर्म वातावरण में रहने आते हैं। ये पक्षी हाल की बारिश के बाद अब अपने सुरक्षित ठिकानों से बाहर निकलने लगे हैं। वे अब भोजन की तलाश में खुले खेतों और दलदली इलाकों की ओर जा रहे हैं। सुबह और शाम के समय आसमान में कतार बनाकर उड़ते इन रंग-बिरंगे और चहचहाते पक्षियों को देखने का नजारा बहुत सुंदर होता है। यह खूबसूरत नजारा यहां के लोगों के लिए सैकड़ों सालों से एक परंपरा जैसा बन गया है। क्योंकि ये पक्षी घाटी में पर्यावरण और पारिस्थितिकी के सबसे भरोसेमंद संकेतकों में से भी एक हैं।

इन पक्षियों के आगमन, उनके स्वास्थ्य और चहचहाट से स्थानीय लोगों को भरोसा होता है कि पर्यावरण के मोर्चे पर अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है, और अगर सही देखभाल और सावधानी बरती जाए, तो ‘धरती पर स्वर्ग’ के रूप में कश्मीर की ख्याति बनी और बची हुई रह सकती है।

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