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Jammu Kashmir: अमरनाथ यात्रा से पहले सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी, आतंकियों का सबसे बड़ा मददगार हाजी लतीफ गिरफ्तार

श्री अमरनाथ यात्रा से ठीक पहले पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आतंकियों के एक कथित मददगार को गिरफ्तार किया है। सूत्रों के अनुसार, 65 वर्षीय हाजी लतीफ अब तक 36 से अधिक आतंकियों को शरण दे चुका है।

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बताया जा रहा है कि वह वर्ष 2021 से आतंकियों की मदद कर रहा था। सूत्रों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में कठुआ, उधमपुर, किश्तवाड़ और डोडा में हुई करीब 12 आतंकी घटनाओं और मुठभेड़ों में उसने आतंकियों की सहायता की। वह सीमा पार से घुसपैठ कर आने वाले जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को पनाह देने के साथ-साथ उन्हें हर तरह की लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराता था।

मोबाइल, भोजन, हथियार और गाइड की निभाता था भूमिका

जांच में सामने आया है कि हाजी लतीफ आतंकियों के लिए मोबाइल फोन की व्यवस्था करता था, उन्हें भोजन पहुंचाता था, हथियार उपलब्ध कराने में मदद करता था और सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने के लिए गाइड की भूमिका भी निभाता था। इसके बदले उसे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से पैसे मिलते थे। हाजी लतीफ मूल रूप से कठुआ जिले के सुफैन गांव का निवासी है और फिलहाल बिलावर क्षेत्र में रह रहा था। मंगलवार को पुलिस ने पुख्ता सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार किया। सूत्रों के अनुसार, उसकी गिरफ्तारी 23 जनवरी 2026 को बिलावर में मारे गए जैश कमांडर उस्मान से जुड़े मामले में की गई है। उस्मान को 17 दिन तक चले सुरक्षा बलों के अभियान में मार गिराया गया था और बताया जाता है कि हाजी ने उसे शरण दी थी।

पत्नी और बेटा पहले से गिरफ्तार

सूत्रों के अनुसार, हाजी की पत्नी और बेटा मार्च 2025 में कठुआ के सुफैन क्षेत्र में मारे गए दो आतंकियों की मदद करने के आरोप में पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। उस मुठभेड़ में 4 पुलिसकर्मी भी वीरगति को प्राप्त हुए थे। हालांकि, हाजी लतीफ की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

स्थानीय लोगों के मोबाइल लेकर आतंकियों से कराता था संपर्क

सूत्रों के मुताबिक, हाजी स्थानीय लोगों को 500 से 1,000 रुपये देकर कुछ समय के लिए उनके मोबाइल फोन लेता था। इन फोन के जरिए आतंकी इंटरनेट के माध्यम से अपने आकाओं से संपर्क करते थे। बातचीत पूरी होने के बाद वह मोबाइल वापस लौटा देता था। इसके अलावा वह पैसे देकर भोजन की व्यवस्था कर आतंकियों तक पहुंचाता था और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित ले जाने में भी मदद करता था।

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