J&K Cabinet Expansion Back in Focus : श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की श्रीनगर वापसी के बीच लंबे समय से लंबित इस प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।
मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम नौ सदस्य हो सकते हैं, जबकि वर्तमान में छह सदस्य हैं और तीन पद खाली हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस संबंध में नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं और पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला से विचार-विमर्श कर सकते हैं। हालांकि, सरकार ने अभी तक विस्तार की तारीख, नए मंत्रियों के नाम या विभागों में फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। कांग्रेस के सरकार से बाहर रहने के फैसले के बीच यह संभावित विस्तार राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
इन संकेतों के बावजूद, प्रस्तावित विस्तार का समय अभी भी अनिश्चित है; तारीख या संभावित मंत्रियों के नामों को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। मंत्रियों के तीन पद अभी भी खाली हैं। विधानसभा चुनावों के बाद, अक्टूबर 2024 में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने कार्यभार संभाला था। वर्तमान में मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सुरेंद्र कुमार चौधरी सहित कुल छह सदस्य हैं। मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों में सकीना मसूद इट्टू, जावेद अहमद राणा, जावेद अहमद डार और सतीश शर्मा शामिल हैं। संवैधानिक ढांचे के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम नौ मंत्री हो सकते हैं।
इसका मतलब है कि मंत्रिपरिषद में तीन और सदस्यों को शामिल करने की गुंजाइश है। इसलिए, इस प्रस्तावित विस्तार पर सबकी नजरें टिकी हैं, खासकर खाली पदों को भरने से जुड़े राजनीतिक और प्रशासनिक पहलुओं को देखते हुए। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला वरिष्ठ नेतृत्व से सलाह ले सकते हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पहले ही संकेत दिया था कि कैबिनेट विस्तार पर फैसला डॉ. फारूक अब्दुल्ला के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा। इस प्रक्रिया में देरी हुई है, जबकि पहले ऐसी उम्मीद थी कि GST काउंसिल की बैठक और विधानसभा के शरद सत्र (ऑटम सेशन) के समापन के बाद इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
इस विस्तार में सरकार में नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है, साथ ही विभागों (पोर्टफोलियो) के बंटवारे में भी बदलाव हो सकते हैं। हालांकि, सरकार ने अभी तक किसी नाम का खुलासा नहीं किया है और न ही यह बताया है कि मौजूदा विभागों में कोई फेरबदल होगा या नहीं। कांग्रेस सरकार से बाहर ही है: नेशनल कॉन्फ्रेंस की चुनावी सहयोगी कांग्रेस पार्टी, मंत्रिपरिषद (काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स) से बाहर बनी हुई है। पार्टी का कहना है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस नहीं मिल जाता, तब तक वह सरकार में शामिल नहीं होगी।
कैबिनेट विस्तार को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कांग्रेस का यह रुख एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू बना हुआ है, हालांकि पार्टी के स्टैंड में किसी बदलाव को लेकर कोई नई घोषणा नहीं की गई है। प्रस्तावित विस्तार का राजनीतिक महत्व: कैबिनेट में प्रस्तावित फेरबदल या विस्तार इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार अपने कार्यकाल के एक नए चरण में प्रवेश कर रही है।
चल रही राजनीतिक बहस के अनुसार, 16 अक्टूबर को सरकार के कार्यकाल के दो साल पूरे हो गए हैं। नए मंत्रियों को शामिल करने से सरकार में बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सकता है और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बंटवारे में बदलाव हो सकते हैं। फिलहाल, उपराज्यपाल (लेफ्टिनेंट गवर्नर) के श्रीनगर लौटने की संभावना ने इस मुद्दे पर फिर से ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि, कैबिनेट विस्तार की अंतिम तारीख, संभावित मंत्रियों के नाम और विभागों के संभावित पुनर्वितरण के बारे में अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है।

