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J&K KVIB ने खादी और हस्तशिल्प कारीगरों के लिए ई-कॉमर्स ऑनबोर्डिंग और क्षमता-निर्माण कार्यशाला आयोजित की

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (जेएंडके केवीआईबी) ने कंजरव इंडिया, वॉलमार्ट वृद्धि और उद्यम वेल के सहयोग से कश्मीर संभाग के खादी एवं हस्तशिल्प कारीगरों के लिए एक दिवसीय ई-कॉमर्स ऑनबोर्डिंग एवं क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला का उद्देश्य कारीगरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना, बाजार तक उनकी पहुंच बढ़ाना और उनकी व्यावसायिक क्षमताओं को मजबूत करना था।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने का दिया प्रशिक्षण

कार्यशाला के दौरान कारीगरों को वॉलमार्ट वृद्धि और उद्यम वेल पर पंजीकरण कराने में सहायता प्रदान की गई। इसके साथ ही ई-कॉमर्स से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें उत्पादों की कैटलॉगिंग, पेशेवर उत्पाद फोटोग्राफी, मूल्य निर्धारण, पैकेजिंग एवं डिस्पैच प्रक्रिया, डिजिटल भुगतान, इन्वेंटरी प्रबंधन, ग्राहक संपर्क और ऑर्डर की पूर्ति जैसे विषय शामिल रहे।

डिजिटल उपस्थिति को वास्तविक बाजार पहुंच में बदलने पर जोर

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त सचिव विक्रमजीत सिंह ने की। कार्यक्रम में जेएंडके केवीआईबी के सचिव/सीईओ, बोर्ड के अधिकारी, कंजरव इंडिया और उद्यम वेल के प्रतिनिधियों के अलावा कश्मीर संभाग के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कारीगर शामिल हुए।

अपने संबोधन में विक्रमजीत सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए जेएंडके केवीआईबी के सचिव/सीईओ और अधिकारियों के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर उत्पादों की मौजूदगी पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल उपस्थिति को एक मजबूत उपभोक्ता-डिलीवरी व्यवस्था और वास्तविक बाजार पहुंच में बदलना जरूरी है।

गुणवत्ता और ओएनडीसी पंजीकरण पर दिया जोर

उन्होंने कारीगरों से उत्पादों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता के उच्च मानकों को बनाए रखने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने उत्पादों की पहचान के लिए क्यूआर कोड आधारित प्रणाली अपनाने और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) पर पंजीकरण कराने की सलाह दी, ताकि कारीगरों को व्यापक और विविध बाजारों तक पहुंच मिल सके।

6,346 हस्तशिल्प इकाइयों को मिली वित्तीय सहायता

जेएंडके केवीआईबी के सचिव/सीईओ ने बोर्ड की ओर से उद्यमिता को बढ़ावा देने, पारंपरिक उद्योगों को मजबूत करने और रोजगार सृजन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), जम्मू-कश्मीर ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम (JKREGP) और पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए फंड योजना (SFURTI) जैसी प्रमुख योजनाओं के माध्यम से लगातार हस्तक्षेप किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में 6,346 हस्तशिल्प इकाइयों को कुल 141.2 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इसके साथ 424 करोड़ रुपये का बैंक ऋण उपलब्ध कराया गया, जिससे 50,768 लोगों के लिए रोजगार का सृजन हुआ।

चार जिलों में एसएफयूआरटीआई क्लस्टर स्थापित

उन्होंने बताया कि एसएफयूआरटीआई के तहत जेएंडके केवीआईबी ने अनंतनाग, बडगाम, पंपोर और पट्टन में चार कार्यशील क्लस्टर स्थापित किए हैं। इन क्लस्टरों से कुल 1,905 कारीगर जुड़े हुए हैं।

पारंपरिक कारीगर अर्थव्यवस्था को डिजिटल मॉडल से जोड़ने की दिशा में कदम

सचिव/सीईओ ने कहा कि यह कार्यशाला पारंपरिक कारीगर अर्थव्यवस्था को डिजिटल रूप से सक्षम और बाजार की मांग के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कारीगरों को अंतिम चरण की चुनौतियों से उबारने और उन्हें डिजिटल बाजारों से प्रभावी रूप से जोड़ने के लिए निरंतर मार्गदर्शन, मेंटरिंग और क्षमता निर्माण आवश्यक है।

कार्यशाला के माध्यम से कारीगरों को अपने पारंपरिक उत्पादों को ई-कॉमर्स बाजार में प्रभावी ढंग से पेश करने, प्रचारित करने और व्यावसायिक रूप से विकसित करने के लिए आवश्यक जानकारी एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान किए गए। इससे उनके बाजार विस्तार, आय के बेहतर अवसरों और टिकाऊ आजीविका की संभावनाओं को मजबूत करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

📍 Location: Statehood (Srinagar)

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