J&K Waqf Board to Intensify Anti-Drug Awareness Campaign : श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन डॉ. सैयद दरख्शां अंद्राबी ने मौलानाओं, मुफ्तियों, इमामों और खतीबों के साथ विशेष बैठक कर नशे के खिलाफ अभियान को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने धार्मिक उपदेशों, सामुदायिक कार्यक्रमों और काउंसलिंग के माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की अपील की। बैठक में धार्मिक विद्वानों ने भी नशामुक्त समाज के निर्माण और युवाओं के सकारात्मक विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
इस बैठक का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में सामाजिक बुराइयों, खासकर नशीली दवाओं और ड्रग्स के दुरुपयोग के ख़िलाफ़ चल रहे अभियान की समीक्षा करना और उसे मज़बूत बनाना था। बैठक में J&K वक्फ़ बोर्ड से जुड़े प्रमुख धार्मिक विद्वानों के साथ-साथ बोर्ड के सदस्य डॉ. गुलाम नबी हलीम और सैयद मोहम्मद हुसैन हक्कानी, विशेष अधिकारी औकाफ़ डॉ. बशीर अहमद (JKAS), कार्यकारी मजिस्ट्रेट (J&K वक्फ़ बोर्ड) इश्त्याक मोहिउद्दीन (JKAS) और जम्मू के एडमिनिस्ट्रेटर आबिद हुसैन (JKAS) शामिल हुए।
जम्मू डिवीज़न की दरगाहों, जामा मस्जिदों और धार्मिक संस्थानों से जुड़े अन्य मुफ़्तियों, इमामों, खतीबों और इमाम-ओ-खतीबों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बैठक में हिस्सा लिया। बैठक के दौरान, डॉ. अंद्राबी ने ड्रग्स के दुरुपयोग और अन्य सामाजिक बुराइयों के ख़िलाफ़ जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए धार्मिक विद्वानों और धर्मगुरुओं द्वारा किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। उन्होंने वक्फ़ बोर्ड द्वारा चार साल पहले शुरू किए गए अभियान को और तेज़ करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, क्योंकि समाज, खासकर युवा पीढ़ी को नशीली दवाओं और अन्य हानिकारक प्रभावों के खतरे से बचाने के लिए सामूहिक प्रयासों का महत्व बढ़ रहा है।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. अंद्राबी ने कहा, “वक्फ बोर्ड ने यह अभियान चार साल पहले शुरू किया था, और अब हमें इसे और तेज करने की जरूरत है। इमाम और खतीब समाज के सच्चे संदेशवाहक होते हैं, और लोग उनकी बातों पर भरोसा करते हैं। हमें नशीली दवाओं और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ इस सामूहिक अभियान को मजबूत करना चाहिए। हमारे युवाओं का चरित्र-निर्माण और व्यक्तित्व-विकास हमारे इमामों और खतीबों का मुख्य फोकस होना चाहिए।” उन्होंने जोर दिया कि धार्मिक संस्थानों और उपदेशकों की सामाजिक चेतना को आकार देने, नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने और युवाओं को रचनात्मक और जिम्मेदार जीवन शैली की ओर मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने नशीली दवाओं के दुरुपयोग के विनाशकारी परिणामों के बारे में लोगों को शिक्षित करने और परिवारों और समुदायों को नशे की लत के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उपदेशों, धार्मिक सभाओं और सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर प्रयासों का आह्वान किया। बैठक में भाग लेने वाले प्रमुख धार्मिक विद्वानों में अनंतनाग के काबा मार्ग के मौलाना अब्दुल रशीद दाऊदी; दरगाह हजरतबल, असारी शरीफ के मौलाना रियाज उल हक नूरबादी; चरार-ए-शरीफ के मीरवाइज मौलाना अमीर उद दीन शाह; ज़ालदगर के इमाम-ओ-खतीब मौलाना अब्दुल हामिद नईमी; जामिया मस्जिद सोनवार के इमाम मौलाना पीर हुसैन कादरी; और खानयार स्थित दस्तीगीर साहिब (आरए) के इमाम-ओ-खतीब मौलाना सैयद मुदस्सिर गिलानी के साथ-साथ विभिन्न जिलों के अन्य धार्मिक विद्वान शामिल थे।
जम्मू डिवीजन के विभिन्न धर्मस्थलों, जामिया मस्जिदों और धार्मिक संस्थानों से जुड़े मुफ्ती, इमाम, खतीब और इमाम-ओ-खतीब भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा में शामिल हुए और नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अन्य सामाजिक चुनौतियों से निपटने के सामूहिक प्रयास में अपनी भागीदारी साझा की। चेयरपर्सन ने इस बात पर जोर दिया कि अभियान को केवल जागरूकता से आगे बढ़कर सार्थक सामुदायिक जुड़ाव में बदलना चाहिए, जिसमें धार्मिक नेता युवाओं की काउंसलिंग करने, पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने और स्वस्थ सामाजिक माहौल को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
बैठक में J&K वक्फ बोर्ड ने धार्मिक विद्वानों और सामुदायिक संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने के अपने संकल्प को दोहराया। इसका मकसद पूरे जम्मू-कश्मीर में नशा-विरोधी अभियान को मज़बूत करना और नैतिक जागरूकता, सामाजिक ज़िम्मेदारी तथा युवाओं के सकारात्मक विकास को बढ़ावा देना है।

