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कश्मीर में स्मार्ट पुलिसिंग पर जोर, हर थाने में डिजिटल बीट के निर्देश

Kashmir Police Pushes Smart and Digital Beat Policing : श्रीनगर। कश्मीर जोन के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) सुजीत कुमार सिंह ने सभी पुलिस थानों को स्मार्ट पुलिसिंग और डिजिटल बीट पुलिसिंग को रोजमर्रा के कामकाज का हिस्सा बनाने के निर्देश दिए हैं।

इसका उद्देश्य पुलिस सेवाओं को आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाना है। आईजीपी ने बीट अधिकारियों को नियमित फील्ड विजिट करने, स्थानीय लोगों से संवाद बढ़ाने और शिकायतों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने जवाबदेही, तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल और पुलिस-जनता के बीच विश्वास मजबूत करने पर जोर देते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को इस पहल के जमीनी क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करने के निर्देश भी दिए।

 

इसमें तकनीक-आधारित सेवाओं, जनता के प्रति जवाबदेही और पुलिस-जनता के बीच बेहतर संबंधों पर विशेष ध्यान दिया गया है। ये निर्देश IGP सुजीत कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान दिए गए। इस सम्मेलन में रेंज के उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG), जिला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), अतिरिक्त SSP, जोनल SSP, पुलिस उपाधीक्षक (DySP) और स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) शामिल हुए। जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (DGP) के विजन और निर्देशों के अनुरूप, इस पहल का उद्देश्य पुलिस स्टेशनों को आधुनिक, कुशल, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल संस्थानों में बदलना है।

सम्मेलन के दौरान, IGP ने ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ के पांच मूल सिद्धांतों पर जोर दिया: सख्त और संवेदनशील (Strict and Sensitive), आधुनिक और गतिशील (Modern and Mobile), सतर्क और जवाबदेह (Alert and Accountable), भरोसेमंद और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाले (Reliable and Responsive), तथा तकनीक-प्रेमी और प्रशिक्षित (Techno-savvy and Trained)। उन्होंने कहा कि ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह हर पुलिस स्टेशन के रोजमर्रा के कामकाज, पेशेवर मानकों, कार्य-संस्कृति और जनता को दी जाने वाली सेवाओं में दिखनी चाहिए।

‘डिजिटल बीट पुलिसिंग’ पर विशेष जोर देते हुए, सभी पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में इसे संस्थागत रूप देने को कहा गया है। IGP ने SHO को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि बीट अधिकारी नियमित रूप से फील्ड विजिट करें, स्थानीय निवासियों के साथ सार्थक बातचीत करें और जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं का समाधान करें। इस पहल के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बीट-स्तर की जानकारी को नियमित रूप से अपडेट करना, स्थानीय गतिविधियों की बेहतर निगरानी करना, शिकायतों का तेजी से निपटारा करना और तकनीक के माध्यम से पारदर्शी पुलिस सेवाएं प्रदान करना शामिल है।

बीट अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करें, लोगों की चिंताओं को पहचानें और यह सुनिश्चित करें कि पुलिस सेवाएं समाज के हर वर्ग तक पहुंचें, जिसमें दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोग भी शामिल हैं। IGP ने इस बात पर जोर दिया कि जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण और प्रभावी पर्यवेक्षण (supervision) बहुत जरूरी है। पर्यवेक्षी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस पहल के क्रियान्वयन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि निर्धारित उपायों के ज़मीनी स्तर पर स्पष्ट परिणाम दिखें।

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