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रफीक की कारीगरी ने बढ़ाया कश्मीर का गौरव

Kashmiri Carpet Artisan Rafeeq Ahmad Sufi Wins : श्रीनगर। कश्मीर की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। श्रीनगर के ईदगाह निवासी मास्टर कारीगर रफीक अहमद सूफी को हाथ से बुने हुए कालीन की श्रेणी में ‘राष्ट्रीय पुरस्कार 2025’ के लिए चुना गया है।

भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की ओर से दिया जाने वाला यह सम्मान उनकी उत्कृष्ट कारीगरी और पारंपरिक कला में योगदान को मान्यता देता है। जम्मू-कश्मीर से इस श्रेणी में वर्ष 2025 के लिए वह पुरस्कार पाने वाले एकमात्र कारीगर हैं। उनके पुरस्कार विजेता कालीन में बारीक फूलों के डिजाइन, पारंपरिक वास्तुकला के नमूने और सुलेख की कलात्मक झलक देखने को मिलती है। उन्होंने यह पुरस्कार एक ऐसे कालीन के लिए जीता है, जिसमें बारीक फूलों के डिज़ाइन, पारंपरिक वास्तुकला के पैटर्न और सुलेख (कैलिग्राफी) के तत्व शामिल हैं। आज जारी एक प्रेस बयान में, विभाग के प्रवक्ता ने मास्टर कारीगर की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर के प्रसिद्ध हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

उन्होंने कहा, “यह सम्मान उनकी असाधारण कारीगरी और हाथ से बुने हुए कालीन की पारंपरिक कला में उनके योगदान को मान्यता देता है।” उन्होंने आगे कहा कि इससे घाटी के कालीन उद्योग को और बढ़ावा मिलेगा। कश्मीर के हाथ से बुने हुए कालीन सदियों पुरानी परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें बेहतरीन बुनाई तकनीक के साथ-साथ विशिष्ट डिज़ाइन और ‘तालीम’ (बुनाई के लिए विशेष निर्देश) का मेल होता है। इसी खासियत के कारण, इसके मूल स्थान को देखते हुए, 2016 में इसे GI (भौगोलिक संकेतक) टैग दिया गया था। प्रवक्ता ने आगे कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर रफ़ीक अहमद सूफी के काम को मिली यह मान्यता, इस पारंपरिक कला की निरंतर उत्कृष्टता और प्रासंगिकता को फिर से साबित करती है।

उन्होंने कहा, “निदेशालय पूरे क्षेत्र के कारीगरों को इस उपलब्धि से प्रेरणा लेने और गुणवत्ता तथा कलात्मकता के उन मानकों को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करता है, जो कश्मीरी हस्तशिल्प की पहचान हैं।” दिसंबर 2026 में एक औपचारिक पुरस्कार समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें अन्य विजेताओं के साथ-साथ रफ़ीक अहमद सूफी को भी सम्मानित किया जाएगा।

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