KDA Backs 15-Day Kargil-Leh March for Statehood : श्रीनगर। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा दिलाने की मांग को लेकर कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने 10 सितंबर से शुरू होने वाली 15 दिवसीय कारगिल-लेह शांति एवं न्याय पदयात्रा को समर्थन दिया है। संगठन ने बड़ी संख्या में लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की है।
यह पदयात्रा सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने सिविल सोसाइटी और राजनीतिक संगठनों के साथ मिलकर आयोजित की है। इसका मकसद लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना, केंद्र शासित प्रदेश को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना और लेह में 24 सितंबर, 2025 को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों को न्याय दिलाना है। KDA ने कारगिल में अपने नेताओं और स्टेकहोल्डर्स की बैठक के बाद अपना समर्थन घोषित किया।
बैठक में KDA के को-चेयरमैन असगर अली करबलाई और सज्जाद कारगिली शामिल हुए। इसमें लद्दाख के सांसद हाजी मोहम्मद हनीफा जान और अन्य प्रतिनिधि भी शामिल हुए। उम्मीद है कि यह पदयात्रा 15 दिनों में कारगिल से लेह तक का रास्ता तय करेगी। KDA शुरुआती हिस्से (हानिस्कोट तक) का समन्वय करेगा और हानिस्कोट के आगे समन्वय की जिम्मेदारी लेह एपेक्स बॉडी संभालेगी। आयोजकों ने कहा है कि पदयात्रा 24 सितंबर को लेह में कैंडललाइट मार्च के साथ खत्म होगी।
इसमें पिछले साल 24 सितंबर को लेह में विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए चार लोगों को याद किया जाएगा। KDA के को-चेयरमैन असगर अली करबलाई ने कहा कि अलायंस शांतिपूर्ण तरीकों से लद्दाख के लोगों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए प्रयास जारी रखेगा। KDA के को-चेयरमैन और पदयात्रा के संयोजक सज्जाद कारगिली, सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडे के साथ मिलकर पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। यात्रा के दौरान नियमित ब्रीफिंग भी की जाएगी। KDA ने पूरे लद्दाख के लोगों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र, धर्म, पंथ, भाषा, लिंग या उम्र की परवाह किए बिना पदयात्रा में शामिल हों।
उन्होंने इस कार्यक्रम को क्षेत्र के भविष्य से जुड़ी एक सामूहिक लोकतांत्रिक कोशिश बताया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब KDA और लेह एपेक्स बॉडी लद्दाख की लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर केंद्र के साथ बातचीत कर रहे हैं। KDA के अनुसार, गृह मंत्रालय के साथ हाल की बातचीत में विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियों तथा संवैधानिक सुरक्षा उपायों से जुड़े मुद्दों पर कुछ प्रगति हुई है। हालांकि, गठबंधन का कहना है कि राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा और 24 सितंबर, 2025 को हुई मौतों के लिए जवाबदेही जैसे मुद्दों पर अभी भी ठोस प्रगति की ज़रूरत है। इसलिए, पिछले साल हुए विरोध-प्रदर्शनों की पहली बरसी से पहले, कारगिल-लेह मार्च के ज़रिए इन मांगों को फिर से सार्वजनिक रूप से उठाया जाएगा।

