
जम्मू/श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लद्दाख के नेतृत्व से कहा है कि भूमि और रोजगार से जुड़े संवैधानिक संरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार के मौखिक आश्वासनों पर भरोसा न करें। उन्होंने कहा कि किसी भी आश्वासन को तब तक स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, जब तक वह लिखित और आधिकारिक रूप से हस्ताक्षिरत रूप में सामने न आए।
पुलवामा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लद्दाख के अपने मुद्दे हैं और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे अलग हैं। हालांकि, एक मित्र और शुभचिंतक के रूप में वह लद्दाख तथा कारगिल के नेतृत्व से आग्रह करना चाहते हैं कि केंद्र से मिलने वाले आश्वासन को लिखित रूप में लिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भी मौखिक आश्वासनों का अनुभव कर चुका है। उनके अनुसार विधानसभा चुनाव के बाद जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन करीब दो वर्ष बीतने के बावजूद यह आश्वासन पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने लद्दाख और कारगिल के नेताओं से कहा कि वे लिखित दस्तावेज या औपचारिक शपथपत्र मिलने तक केवल मौखिक प्रतिबद्धताओं पर निर्भर न रहें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाओं को लागू करने और उपलब्ध धन के उपयोग के मामले में पुलवामा जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में अग्रणी जिलों में शामिल हो सकता है। उन्होंने अधिकारियों से चालू निर्माण अविध के अगले दो-तीन महीनों में उपलब्ध धन का अधिकतम उपयोग करने को कहा। उन्होंने बताया कि बुधवार को पुलवामा जिले में करीब 100 करोड़ रु पए की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किया गया।
इनमें सड़क, विद्यालय, अस्पताल, पुल और दुग्ध प्रसंस्करण गांव से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारियों की हड़ताल पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन सरकार आंदोलन जारी रहने के दौरान मांगों पर बातचीत नहीं करेगी। उन्होंने कर्मचारियों से आंदोलन समाप्त कर बातचीत का रास्ता अपनाने का आग्रह किया।
विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा के विधानसभा सत्र की अविध को लेकर दिए गए बयान पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह हर दिन दिए जाने वाले बयानों का जवाब देने के लिए समय नहीं निकाल सकते। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक बयान का जवाब पहले ही दे दिया है और अगला जवाब अक्तूबर में देंगे।
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