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जल्द खुलेगा लद्दाख जाने का रास्ता: अंतिम फेज़ में पहुँचा जोजिला टनल प्रोजेक्ट

November 23, 2025

जल्द खुलेगा लद्दाख जाने का रास्ता: अंतिम फेज़ में पहुँचा जोजिला टनल प्रोजेक्ट

जम्मू- कश्मीर: लद्दाख को सालभर मुख्यधारा से जोड़ने वाला जोजिला टनल अब लगभग अपने अंतिम चरण में है। परियोजना को अंजाम दे रही कंपनी एमईआईएल (MEIL) के जनरल मैनेजर, रिटायर्ड कर्नल शिव कुमार के अनुसार, मेन टनल की कुल 13 किलोमीटर लंबाई में से केवल 250 मीटर की खुदाई शेष है। उम्मीद है कि निर्धारित नवंबर 2028 की समयसीमा के भीतर पूरी परियोजना समाप्त कर ली जाएगी।

2020 में शुरुआत, मौसम ने डाला था ब्रेक

टनल निर्माण का औपचारिक कार्य अक्तूबर- नवंबर 2020 में शुरू हुआ था, लेकिन शुरुआती महीनों में भीषण ठंड और ऊँचाई वाले क्षेत्र की चुनौतियों के कारण काम रुक-रुककर ही हो पाया। 2021 में मौसम सुधरने के बाद कार्य में तेजी आई और कश्मीर तथा लद्दाख दोनों दिशाओं से एक साथ खुदाई शुरू की गई।

प्रोजेक्ट दो बड़े हिस्सों में विभाजित

कर्नल कुमार ने बताया कि परियोजना को दो फेज़ में बांटा गया है:

1. सोनमर्ग से वेस्टर्न पोर्टल तक 17 किमी की अप्रोच

1.95 किमी व 450 मीटर की दो छोटी टनल

एवलांच-प्रोन क्षेत्र में 7 कट-एंड-कवर स्ट्रक्चर

स्नो गैलरी, चार पुल और जंक्शन

बर्फ़ीले ढलानों से सुरक्षा के लिए कैच डैम

इस हिस्से का अधिकांश कार्य पूरा कर लिया गया है।

2. 13 किमी की मेन Zojila टनल

सिर्फ 250 मीटर खुदाई बाकी

2.25 किलोमीटर में कंक्रीट लाइनिंग पूर्ण

अन्य सेक्शनों में लाइनिंग का काम जारी

लद्दाख की ‘लाइफलाइन’ बनने को तैयार

11,850 फीट की ऊंचाई पर स्थित जोजिला दर्रा हर साल भारी बर्फबारी के कारण 5–6 महीने तक बंद रहता है। यहां 12–15 मीटर तक बर्फ गिरने से लद्दाख का संपर्क कट जाता है। टनल चालू होने के बाद साल के 12 महीने, 24×7 यातायात सुचारू रूप से चल सकेगा, जिससे स्थानीय लोगों, पर्यटन क्षेत्र और व्यापार को बड़ा फायदा मिलेगा। रणनीतिक दृष्टि से भी यह टनल सेना के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। कर्नल कुमार के अनुसार, परियोजना में बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है।

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4,500 करोड़ की लागत, बाईडायरेक्शनल डिज़ाइन

करीब 4,500 करोड़ रुपये की लागत वाली यह बाईडायरेक्शनल टनल सभी प्रकार के वाहनों की निर्बाध आवाजाही के लिए डिज़ाइन की गई है।
हिमालय की सक्रिय जियोलॉजी को देखते हुए निर्माण में बड़ी तकनीकी चुनौतियाँ हैं, लेकिन स्थानीय पत्थरों और उपलब्ध सामग्री का अधिकतम उपयोग करके काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।

कंपनी का दावा है कि नवंबर 2028 की डेडलाइन तक परियोजना पूरी होने में अब कोई बड़ी बाधा नहीं दिख रही है।

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