जम्मू: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को प्रो.गिरिधर प्रसाद ठाकुर की याद में पुस्तक विमोचन कार्यक्र म में भाग लिया। उपराज्यपाल ने मनोवैज्ञानिक अनुसंधान और शिक्षण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रो. गिरिधर प्रसाद ठाकुर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उपराज्यपाल ने कहा कि अपने पूरे जीवन में प्रोफैसर ठाकुर ने अनुसंधान और शिक्षण दोनों में उत्कृष्टता हासिल की। उन्होंने कहा कि प्रोफैसर ठाकुर ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में मनोविज्ञान विभाग के प्रमुख और सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन के रूप में कार्य किया था। उन्होंने दुनिया भर के मनोविज्ञान से संबंधित संगठनों में विभिन्न पदों पर भी कार्य किया।
इंडियन अकैडमी ऑफ एप्लाइड साइकोलॉजी के अध्यक्ष के रूप में प्रो.ठाकुर ने अनुसंधान के मार्गदर्शन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राज्यपाल ने बताया कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में योगदान के अलावा दुनिया के कुछ सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से अलंकृत किया गया था। प्रो.ठाकुर ने प्रदर्शित किया था कि भारतीय ज्ञान प्रणाली मनोवैज्ञानिक परीक्षण मॉडल के लिए ठोस आधार प्रदान करती है। उन्होंने इंडियन स्कूल साइकोलॉजी एसोसिएशन के विकास का मार्गदर्शन किया और मनोवैज्ञानिक अनुसंधान में भारत को विश्व मानचित्र पर लाने वाले कई संगठनों का पोषण किया। प्रोफैसर ठाकुर भारत में खेल मनोविज्ञान के अग्रणी थे। उन्होंने खिलाड़ियों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के लिए मनोवैज्ञानिक ज्ञान और कौशल का उपयोग करके बहुत बड़ा योगदान दिया।
उपराज्यपाल ने कहा कि मनोविज्ञान और विज्ञान ने सामाजिक समावेश और इक्विटी में बहुत बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति की राह में युवा पीढ़ी और अकादमिक दुनिया को अनुभव और शोध कार्यों के माध्यम से लाभान्वित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति2020 मूल्य-आधारित शिक्षा,नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा दे रही है और भविष्य की मानव पूंजी का निर्माण कर रही है। इस अवसर पर उनके साथ प्रो.एस. वराखेड़ी कुलपति केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली, प्रो.नागेश्वर राव कुलपति इग्नू नई दिल्ली, प्रो.दिनेश सिंह पूर्व कुलपति दिल्ली विश्वविद्यालय, डा.अर्चना ठाकुर संयुक्त सचिव यूजीसी, प्रो.गिरिधर प्रसाद ठाकुर के परिवार के सदस्य और सभी क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां उपस्थित थीं।
