श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने श्रीनगर स्थित प्रतिष्ठित हज़रतबल दरगाह विवाद और घाटी में विपक्षी नेताओं की नज़रबंदी को लेकर भाजपा की नीतियों को कठघरे में खड़ा किया है।
मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बयान में कहा कि सरकार ने प्रोफेसर अब्दुल गनी भट के निधन पर शोक जताने के लिए नेताओं को सोपोर जाने से जबरन रोका। यह क़दम, उनके अनुसार, जम्मू-कश्मीर में “तानाशाही और लोकतंत्र के गला घोंटने” जैसा है।
The decision to place the political leadership under house arrest today, simply to stop us from visiting Sopore to offer condolences on the demise of Professor Abdul Gani Bhat, lays bare the harsh and undemocratic reality in Jammu and Kashmir.
What unfolded at Hazratbal Dargah… pic.twitter.com/M0BmZ276oM
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) September 18, 2025
उन्होंने कहा, “हज़रतबल में जो कुछ हुआ, वह कोई अलग-थलग घटना नहीं थी बल्कि वर्षों से जमा हुए जनाक्रोश का विस्फोट था। यह एक स्पष्ट संकेत है कि कश्मीरी लोग अब अपने साथ हो रहे अन्याय को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे।”
“भाजपा कश्मीर की पीड़ा को बना रही है राजनीतिक हथियार”
महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह कश्मीर की अस्थिरता को जानबूझकर बनाए रख रही है ताकि बाकी भारत में राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।
उन्होंने लिखा, “भाजपा को कश्मीर में शांति लाने में कोई रुचि नहीं है। वे यहां की पीड़ा, असंतोष और संवेदनशीलता का इस्तेमाल चुनावी राजनीति के लिए कर रहे हैं। यह रवैया न सिर्फ़ अमानवीय है, बल्कि देश की एकता के लिए खतरनाक भी है।”
हज़रतबल दरगाह में पट्टिका विवाद: क्या है मामला?
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में देखा गया कि कुछ लोगों की भीड़ ने हज़रतबल दरगाह परिसर में एक संगमरमर की पट्टिका को क्षतिग्रस्त किया, जिस पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चिह्न अंकित था। इस घटना ने धार्मिक भावनाओं और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह का प्रतीक धार्मिक स्थल पर नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह इस्लामी परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
फारूक़ अब्दुल्ला ने भी की आलोचना
इस विवाद पर नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक़ अब्दुल्ला ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को ऐसी पट्टिका लगाने से पहले समुदाय की संवेदनाओं का ध्यान रखना चाहिए था।

