
श्रीनगर: श्रीनगर स्थित जामा मस्जिद की प्रबंधन समिति ने शुक्रवार को कहा कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ‘नजरबंदी’ से रिहाई के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन को कानूनी नोटिस भेजेंगे। इसने कहा कि नोटिस के माध्यम से मीरवाइज अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगेंगे कि क्या वह स्वतंत्र हैं या नजरबंद हैं। यहां नौहट्टा में मस्जिद की प्रबंधन समिति ‘अंजुमन औकाफ जामा मस्जिद’ ने एक बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा दिए गए ‘‘परस्पर विरोधी बयानों’’ के मद्देनजर मीरवाइज ने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया है।
‘द लल्लनटॉप’ को दिए एक साक्षात्कार में सिन्हा ने कहा था कि मीरवाइज सुरक्षा के साथ, जहां चाहें वहां जा सकते हैं। उपराज्यपाल ने कहा, ‘‘मैंने शुक्रवार की नमाज के लिए अपना मन बना लिया है, सब कुछ शांति से हो जाए। वह (मीरवाइज) भी शुक्रवार की नमाज अदा करेंगे। वह सुरक्षा के साथ जहां चाहें जा सकते हैं।’’ हालांकि, अंजुमन ने दावा किया कि हर तरफ से मीरवाइज की रिहाई की बार-बार अपील और उपराज्यपाल के बयानों के बावजूद, उमर फारूक 2019 से घर में नजरबंद हैं। अंजुमन ने कहा कि अब मीर वाइज को कानूनी रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ा है। इसने कहा कि संबंधित प्राधिकारियों को आज नोटिस भेजा जाएगा।