Site icon Dainik Savera Times

फारूक अब्दुल्ला के कश्मीर वाले बयान पर भड़के एनडीए नेता, कहा- ऐसी राजनीति अब स्वीकार्य नहीं

 Farooq Abdullah

 Farooq Abdullah

जम्मू कश्मीर डेस्क। नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के जम्मू-कश्मीर को लेकर दिए गए बयान पर कई एनडीए नेताओं ने रविवार को पलटवार किया। एनडीए नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ केंद्र की कार्रवाई, अनुच्छेद 370 हटाने और पाकिस्तान को लेकर भारत के रुख का हवाला दिया।

पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति में बड़ा बदलाव आया है और वहां के लोग आतंकवाद नहीं बल्कि विकास चाहते हैं। उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर में कोई आतंकवादी नहीं बचा है। यह आतंकवाद से मुक्त हो गया है। वहां के लोग आतंकवाद नहीं चाहते हैं। वहां विकास हो रहा है और केंद्र सरकार इसे देश के बाकी हिस्सों के साथ एकीकृत करके विकसित करने का काम कर रही है। वहां के लोग भी खुश हैं। वहां के नेता केवल क्षेत्र को अलग रखकर राजनीति करना जानते हैं, लेकिन इस तरह की राजनीति अब नहीं चलेगी।”

फारूक अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए दिलीप घोष ने कहा, “वह पाकिस्तान से हाथ मिलाते हैं। फारूक अब्दुल्ला की राजनीति अब तक इसी तरह चलती रही है। यह अब स्वीकार्य नहीं होगा। केवल भाजपा ही प्रगति और जनआकांक्षाओं को पूरा कर सकती है।” उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओपी राजभर ने भी अब्दुल्ला के बयान की आलोचना की और केंद्र सरकार द्वारा आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने और जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल करने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया।

मंत्री ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला शायद नहीं जानते कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आतंकवादी गतिविधियों पर बड़े पैमाने पर अंकुश लगाया गया है। कश्मीर के मामले में आपने देखा कि अनुच्छेद 370 को हटा दिया गया। वहां जो हिंसा और खून-खराबा होता था, उसे भी काफी हद तक रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज स्थिति ऐसी है कि जब भी देश के प्रधानमंत्री किसी दूसरे देश की यात्रा पर जाते हैं तो वे कहते हैं कि हम भगवान बुद्ध की धरती से आए हैं और शांति का संदेश लेकर आए हैं। हम लड़ाई-झगड़े के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि दोस्ती और प्यार से रहना चाहते हैं। प्रधानमंत्री हमेशा यही संदेश देते हैं।

बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को उत्तर कश्मीर के बारामूला में एक पार्टी सम्मेलन में बोलते हुए कश्मीर पर केंद्र की चुप्पी पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान द्वारा इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीवित रखने के प्रयास क्षेत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं और नई दिल्ली पर सवाल उठाया था।

Exit mobile version