Last Updated: October 14, 2026

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नेपाल में आई बाढ़ से सबक ले J&K, हिमालयी पर्यावरण संरक्षण जरूरी: मीरवाइज

August 29, 2026

नेपाल में आई बाढ़ से सबक ले J&K, हिमालयी पर्यावरण संरक्षण जरूरी: मीरवाइज

श्रीनगर: मीरवाइज-ए-कश्मीर डॉ. मौलवी मुहम्मद उमर फारूक ने शुक्रवार को नेपाल और पूरे हिमालयी क्षेत्र में बाढ़ से हुई तबाही को जम्मू-कश्मीर के लिए गंभीर चेतावनी बताया। उन्होंने क्षेत्र की नाजुक पहाड़ी पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) की बेहतर सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया।

ऐतिहासिक जामा मस्जिद श्रीनगर में शुक्रवार की जमात को संबोधित करते हुए मीरवाइज ने नेपाल के लोगों के प्रति एकजुटता व्यक्त की और आपदा में जान गंवाने वालों, लापता लोगों तथा प्रभावित सभी परिवारों के लिए दुआ की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भी उसी संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र का हिस्सा है, जहां पहले से ही भारी बारिश, बादल फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। मीरवाइज ने कहा कि जलवायु परिवर्तन निश्चित रूप से इन घटनाओं का एक बड़ा कारण है, लेकिन हमें यह भी विचार करना होगा कि क्या हमारा मौजूदा विकास मॉडल इन प्राकृतिक जोखिमों को और बढ़ा रहा है।

मीरवाइज ने कहा कि कश्मीर के पहाड़, झीलें और नदियां केवल इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि बड़ी आबादी की आजीविका का भी आधार हैं। हालांकि, उन्होंने वाणिज्य और विकास के नाम पर क्षेत्र की पारिस्थितिकी के लापरवाह दोहन पर चिंता जताई। उन्होंने पहाड़ों को काटकर और ब्लास्टिंग के जरिए सड़कें बनाने, पेड़ों की कटाई, पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में होटल और अन्य निर्माण तथा प्राकृतिक जल निकासी के रास्तों में रुकावट का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि वैज्ञानिक और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों की अनदेखी कर लगातार निर्माण कार्य करने से भविष्य में बड़ी तबाही का खतरा बढ़ सकता है।

मीरवाइज ने वेटलैंड्स, झीलों और प्राकृतिक बाढ़ मार्गों पर अतिक्रमण को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने लोगों से ऐसे क्षेत्रों में कब्जा करने या निर्माण करने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि वेटलैंड्स बेकार या अनुपयोगी जमीन नहीं हैं, बल्कि वे प्राकृतिक बफर का काम करते हैं, जो अतिरिक्त पानी को सोखकर मानव बस्तियों को बाढ़ से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

डल झील का उदाहरण देते हुए मीरवाइज ने कहा कि इसकी मौजूदा स्थिति लंबे समय से चले आ रहे अतिक्रमण, अनियंत्रित निर्माण और पर्यावरण की अनदेखी के परिणामों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ अपनी डल झील की हालत देखने की जरूरत है, ताकि हम समझ सकें कि लंबे समय तक अतिक्रमण, निर्माण और पर्यावरण की अनदेखी किस तरह एक बहुमूल्य प्राकृतिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है। यह दिन-ब-दिन सिकुड़ती जा रही है और हम ऐसे देखते रहते हैं, जैसे इसका हमसे कोई लेना-देना ही न हो।

पवित्र कुरान का हवाला देते हुए उन्होंने धरती पर सुधार के बाद उसमें भ्रष्टाचार न फैलाने की हिदायत का भी उल्लेख किया। मीरवाइज ने कहा कि हिमालय के नाजुक पर्यावरण की रक्षा की जिम्मेदारी केवल सरकार या प्रशासन की नहीं, बल्कि योजनाकारों, कारोबारियों और आम नागरिकों की भी है। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन के विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि पहाड़ों, जंगलों, वेटलैंड्स और प्राकृतिक जलमार्गों को नुकसान पहुंचाने के ऐसे परिणाम सामने आ सकते हैं, जिनकी भरपाई संभव नहीं होगी।

मीरवाइज ने कहा कि नेपाल की त्रासदी को हमें अपने देश के लिए एक करीबी चेतावनी के रूप में देखना चाहिए। हम भी हिमालय में रहते हैं। उन्होंने कहा कि आज पर्यावरण की रक्षा करना केवल आपदाओं से बचाव का सवाल नहीं है, बल्कि यह हमारे बच्चों की जान, उनके घरों और उनके भविष्य की रक्षा का सवाल भी है।

📍 Location: Srinagar (Srinagar)

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