जम्मू-कश्मीर: दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके की जांच नए चरण में प्रवेश कर गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आज जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के मट्टन वन क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। यह ऑपरेशन स्थानीय पुलिस और CRPF के साथ संयुक्त रूप से अंजाम दिया गया।
‘सफेदपोश’ मॉड्यूल से जुड़े दो आरोपी हिरासत में
अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान NIA ने दो संदिग्धों डॉ. अदील राठेर और जसीर बिलाल वानी को साथ लेकर छापेमारी की। दोनों को कथित रूप से एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है, जो आतंकी गतिविधियों को आर्थिक और बौद्धिक समर्थन प्रदान करता है। पूछताछ में इन आरोपियों ने जंगलों में कुछ छिपे ठिकानों का खुलासा किया था, जिनके आधार पर यह तलाशी अभियान संचालित किया गया।
10 नवंबर को लाल किले के पास हुआ था धमाका
10 नवंबर की शाम लगभग 6:52 बजे लाल किला मेट्रो स्टेशन से कुछ ही दूरी पर खड़ी एक Hyundai i20 कार में जोरदार विस्फोट हुआ था। धमाका इतना तीव्र था कि आसपास के इलाके में भागमभाग मच गई। घटना में 15 लोगों की मौत और 20 से अधिक लोग घायल हो गए थे। शुरुआती जांच में इसे आतंकी वारदात का हिस्सा माना गया।
कार का मालिक आमिर गिरफ्तार
NIA की जांच में सामने आया कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई कार आमिर नाम के व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड थी। एजेंसी के अनुसार, आमिर न केवल हमले की साजिश में शामिल था, बल्कि कथित आत्मघाती हमलावर की मदद करने और हमले की तैयारी में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। NIA ने दिल्ली से आमिर को गिरफ्तार किया और उससे पूछताछ जारी है।
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कई राज्यों में फैला नेटवर्क
जांच अधिकारियों को संदेह है कि इस मॉड्यूल के तार सिर्फ दिल्ली और कश्मीर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार तक फैले हुए हैं। एजेंसी को कुछ विदेशी स्रोतों से फंडिंग के संकेत भी मिले हैं। NIA का मानना है कि यह नेटवर्क ‘सफेदपोश’ व्यक्तियों द्वारा संचालित किया जा रहा था, जो सामने आए बिना आतंकियों को सहारा देते थे।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। NIA इस पूरे मॉड्यूल को जड़ से खत्म करने के लिए देशभर में छापेमारी तेज कर रही है। एजेंसी का कहना है कि लाल किला विस्फोट का मकसद केवल दहशत फैलाना नहीं, बल्कि दिल्ली में अस्थिरता पैदा करने की एक संगठित साजिश थी।

