Heritage Conservation की रफ्तार पर प्रशासनिक अड़चनें भारी

Obstacles to the pace of heritage conservation : श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को लेकर सरकारी रिकॉर्ड में कई कमियां और प्रशासनिक अड़चनें सामने आई हैं। प्राचीन स्मारकों की डॉक्यूमेंटेशन, स्टाफ की कमी, तकनीकी मंजूरी, अतिक्रमण, कानूनी विवाद और लंबित DPR जैसी समस्याएं संरक्षण कार्यों की गति प्रभावित कर रही हैं।
मुबारक मंडी हेरिटेज कॉम्प्लेक्स समेत कई प्रमुख परियोजनाओं में लंबे समय से चल रहे कार्य भी चुनौतियों को उजागर करते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित 56 स्मारकों की देखभाल करता है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय का कहना है कि इन स्थलों पर ज़रूरत और संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार संरक्षण, बहाली और संरचनात्मक मजबूती का काम किया जा रहा है।
सरकार के ही जवाब से पता चलता है कि LiDAR मैपिंग, GIS और ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण जैसी आधुनिक डॉक्यूमेंटेशन तकनीकें केवल कुछ चुने हुए स्मारकों – जैसे नारनाग, मार्तंड और बुनियार – के लिए ही प्रस्तावित की गई हैं। डॉक्यूमेंटेशन और संरक्षण का मुद्दा सिर्फ़ ASI के स्मारकों तक ही सीमित नहीं है। J&K के अभिलेखागार, पुरातत्व और संग्रहालय विभाग ने जून 2025 में पूरे केंद्र शासित प्रदेश में चल रहे 150 कामों और राज्य द्वारा संरक्षित सभी 54 स्मारकों का निरीक्षण करने के लिए एक विशेष “मिशन निरीक्षण” शुरू किया।
विभाग के अनुसार, निरीक्षण टीमों को खास तौर पर संरक्षण कार्यों में कमियों की पहचान करने और अतिक्रमण, रुके हुए प्रोजेक्ट्स, विवादों, कानूनी मुकदमों और ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) की कमी जैसे मुद्दों की जांच करने का काम सौंपा गया था। इतने बड़े पैमाने पर निरीक्षण की ज़रूरत ने धरोहर संरक्षण कार्यों की नियमित निगरानी की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आधिकारिक विभागीय रिकॉर्ड संरक्षण प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी मिलने से लेकर उन्हें लागू करने तक में होने वाली प्रशासनिक देरी की ओर भी इशारा करते हैं।
मार्च 2026 में, अभिलेखागार, पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय ने धरोहर संरक्षण योजनाओं और 2026-27 के CAPEX बजट के तहत मंज़ूर प्रोजेक्ट्स के लिए तकनीकी रूप से जांची-परखी विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और इस बात का सर्टिफ़िकेशन मांगा कि स्थल किसी भी तरह के कानूनी या अन्य विवादों से मुक्त हैं। पत्राचार से पता चला कि कुछ DPR अभी भी लंबित थीं, जिससे मंज़ूर धरोहर कार्यों को शुरू करने में एक और प्रक्रियात्मक अड़चन पैदा हो गई। स्टाफ़ की कमी और संस्थागत क्षमता भी चिंता का विषय बनकर उभरी हैं।
नीति आयोग के लिए तैयार की गई धरोहर-प्रबंधन से जुड़ी एक रिपोर्ट में पहले ही यह बात सामने आई थी कि J&K के अभिलेखागार, पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय को अपनी क्षमता बढ़ाने की ज़रूरत है। विभागीय रिकॉर्ड में खाली पदों और अभिलेखीय रिकॉर्ड्स के लिए लंबे समय तक संरक्षण के उपायों की ज़रूरत से जुड़े निर्देश भी दर्ज हैं। प्रमुख धरोहर प्रोजेक्ट्स की स्थिति बहाली में लगने वाले लंबे समय की समस्या को और भी साफ़ तौर पर दिखाती है। जम्मू में डोगरा विरासत की अहम निशानी, मुबारक मंडी हेरिटेज कॉम्प्लेक्स का मरम्मत का काम कई सालों से चल रहा है। हालांकि कुछ हिस्सों में काम आगे बढ़ा है, लेकिन इस ऐतिहासिक कॉम्प्लेक्स के अंदर संरक्षण का बड़ा काम अभी भी जारी है। सरकार ने समय-समय पर मरम्मत के काम में तेज़ी लाने और कॉम्प्लेक्स के अंदर मौजूद ऐतिहासिक इमारतों के क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक करने के निर्देश भी दिए हैं।
