श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गांधी जयंती के अवसर पर युवाओं और नागरिकों से सत्य, अहिंसा, संवाद और मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। श्रीनगर में स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित गांधी जयंती समारोह में शामिल हुए उपराज्यपाल ने कहा कि महात्मा गांधी ने अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सम्मान के साथ जीवन जीने के लिए भारत को सोचने का नया रास्ता दिया।
उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को गांधी जयंती की शुभकामनाएं दीं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने वाले बच्चों तथा सत्य और अहिंसा विषय पर जिला स्तरीय संगोष्ठी के विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने गुलजार अहमद द्वारा प्रस्तुत बापू के भजन के कश्मीरी रूपांतरण, इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक एंड फाइन आर्ट्स के विद्यार्थियों की हिंदी प्रस्तुति और गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल कोठीबाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नाटक की भी सराहना की।
मनोज सिन्हा ने कहा कि आज के तेजी से बदलते और तकनीक आधारित दौर में गांधी जी की सत्य और अहिंसा की विरासत अब भी प्रासंगिक है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को गलत सूचना से सावधान रहने तथा किसी भी सूचना पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसके तथ्यों की पुष्टि करने और संवाद के माध्यम से समझ विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि “सत्यमेव जयते” लोकतंत्र का मार्गदर्शक सिद्धांत बना रहना चाहिए।
उनके अनुसार, सत्य केवल किसी तथ्य को स्वीकार करने का विषय नहीं, बल्कि उसे जांचने, स्वयं के भीतर झांकने तथा प्रतिक्रिया देने से पहले दूसरे पक्ष को सुनने और समझने की आदत भी है। उपराज्यपाल ने तकनीक के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक मानव नियंत्रण में रहनी चाहिए और प्रगति के साधन के रूप में काम करनी चाहिए, न कि मानवीय विवेक का विकल्प बननी चाहिए। उन्होंने बच्चों और युवाओं से आधुनिक तकनीक का अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करने को कहा।
उन्होंने भारत की विविधता को उसकी शक्ति बताते हुए कहा कि अलग-अलग भाषाओं, पूजा पद्धतियों, पहनावे और परंपराओं के बावजूद साथ मिलकर आगे बढ़ना देश की महत्वपूर्ण विशेषता है। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण को विकास का महत्वपूर्ण पैमाना बताया। उपराज्यपाल ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भरता, स्थानीय उत्पादों, कारीगरों, छोटे उद्यमों और किसानों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने बच्चों में चरित्र निर्माण को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि किसी राष्ट्र का चरित्र उसकी सबसे स्थायी आधारभूत संरचना है।
उन्होंने युवाओं से यह आत्ममंथन करने का आह्वान किया कि वे सत्य को आगे बढ़ा रहे हैं या अफवाह को, संवाद कर रहे हैं या केवल प्रतिक्रिया दे रहे हैं और समाज को जोड़ने में योगदान दे रहे हैं या अनजाने में विभाजन बढ़ा रहे हैं। समारोह में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, स्कूल एवं उच्च शिक्षा तथा सामाजिक कल्याण मंत्री सखीना मसूद इतू, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, पद्म भूषण राजीव सेठी, पद्मश्री डॉ. एस.पी. वर्मा, राम निवास शर्मा, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षण संस्थानों के प्रमुख, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।