
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कुछ और है। झील की सफाई के दौरान वहां से एक विस्फोटित मिसाइल का मलबा बरामद हुआ है, जिसे प्रारंभिक जांच में पाकिस्तान निर्मित माना जा रहा है। यह मलबा कथित रूप से उस समय का है जब मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तनाव के दौरान ऑपरेशन ‘सिंदूर’ चलाया गया था।
डल झील की नियमित सफाई के तहत शनिवार को जब कर्मचारी झील की सतह की सफाई कर रहे थे, तभी उन्हें धातु के कुछ बड़े टुकड़े दिखाई दिए। पास जाकर देखने पर यह साफ हुआ कि यह कोई सामान्य कबाड़ नहीं, बल्कि किसी भारी हथियार का अवशेष है। तुरंत ही इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और पुलिस को दी गई।
जांच के लिए सौंपा गया मलबा
मलबे को तुरंत श्रीनगर के एक नजदीकी पुलिस स्टेशन को सौंपा गया, जहां से इसे सुरक्षा एजेंसियों और बम स्क्वॉड के हवाले कर दिया गया है। विशेषज्ञों की एक टीम इस बात की जांच कर रही है कि यह मलबा वास्तव में किस प्रकार के हथियार का हिस्सा है और इसे कब और कैसे डल झील में दागा गया।
श्रीनगर में मई में हुए थे जोरदार धमाके
गौरतलब है कि 10 मई को श्रीनगर में कई विस्फोटों की खबर सामने आई थी। स्थानीय लोगों ने डल झील की ओर एक तेज धमाका और धुएं के गुबार देखे थे। शुरुआत में इसे आतंकी साजिश माना गया, लेकिन बाद में यह सामने आया कि यह धमाके भारत और पाकिस्तान के बीच हुई झड़पों का हिस्सा थे, जो ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान हुई थीं।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर?
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की निर्मम हत्या के बाद भारत सरकार ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी। इस सैन्य कार्रवाई के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान की सीमा में स्थित आतंकी ठिकानों पर निशाना साधा। भारतीय वायुसेना द्वारा की गई इस जवाबी कार्रवाई में सैकड़ों आतंकियों को ढेर कर दिया गया।
इस हमले के जवाब में पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया, जिनमें से अधिकांश को भारत की एयर डिफेंस प्रणाली ने बीच में ही नष्ट कर दिया। लेकिन कुछ मिसाइल श्रीनगर के आसमान से होकर गुजरीं, जिनमें से एक डल झील में गिरी थी – जिसका मलबा अब सामने आया है।
झीलों की सुरक्षा पर सवाल
डल झील न सिर्फ श्रीनगर की खूबसूरती का प्रतीक है, बल्कि कश्मीर के पर्यटन उद्योग की रीढ़ भी है। ऐसे में वहां किसी मिसाइल का गिरना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना की गहराई से जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना दोहराई न जा सके।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
मलबा बरामद होने के बाद स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। पूरे इलाके की तलाशी ली जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि झील में और कोई संदिग्ध वस्तु न हो। इस बीच सेना और NSG की टीमें भी घटनास्थल का दौरा कर चुकी हैं।