Paramedical staff : किश्तवार जिला अस्पताल के गायनी वार्ड में उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई जब पोस्ट-सीज़ेरियन सेक्शन वार्ड में भर्ती कई मरीजों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। मरीजों के परिजनों ने पारा-मेडिकल स्टाफ पर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
अटेंडेंट्स के अनुसार, यह जटिलताएं तब उत्पन्न हुईं जब पारा-मेडिकल स्टाफ ने मरीजों को डाइक्लोफेनाक सोडियम के इंजेक्शन लगाए। परिजनों का दावा है कि लगाए गए इंजेक्शन की बैच लगभग समाप्ति तिथि पर थी, जिसकी एक्सपायरी इसी महीने की थी। इंजेक्शन लगने के बाद कुछ मरीजों में प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जिससे उनके परिजनों में दहशत फैल गई।
परिजनों द्वारा बार-बार आग्रह करने के बावजूद पारा-मेडिकल स्टाफ ने समय पर आवश्यक चिकित्सा सहायता नहीं दी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि स्टाफ ने न तो अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों का पालन किया और न ही अस्पताल में निर्धारित ड्रेस कोड का पालन किया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जब किश्तवार पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) ने हस्तक्षेप किया, तब वरिष्ठ गायनोकॉलजिस्ट वार्ड में पहुंचे। इमरजेंसी विभाग के डॉक्टरों ने भी तत्काल प्रतिक्रिया दी और आवश्यक दवाएं देकर मरीजों की हालत को स्थिर किया।
परिजनों से आग्रह किया गया है कि वे लापरवाही बरतने वाले पारा-मेडिकल स्टाफ के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराएं। इस घटना ने अस्पताल स्टाफ की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे जवाबदेही तय करने और मरीजों की देखभाल में सुधार की मांग तेज हो गई है।

