PDP Protests for Release of J&K Reservation Report : श्रीनगर। PDP कार्यकर्ताओं ने पार्टी नेता इल्तिजा मुफ्ती की अगुवाई में शनिवार को श्रीनगर में पार्टी मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि जम्मू-कश्मीर की आरक्षण नीति को तर्कसंगत बनाने पर बनी कैबिनेट सब-कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए और लोगों के सामने रखा जाए।
प्रदर्शनकारियों ने प्लेकार्ड लेकर और नारे लगाते हुए रिपोर्ट को तुरंत जारी करने की मांग की। यह कमेटी मौजूदा आरक्षण ढांचे से जुड़ी शिकायतों की जांच करने और इसे तर्कसंगत बनाने के उपाय सुझाने के लिए बनाई गई थी। प्लेकार्ड में रिपोर्ट जारी करने और उस पर सार्वजनिक चर्चा करने की मांग की गई, साथ ही EWS और रेजिडेंशियल-कंडीशन (निवास संबंधी शर्त) से जुड़ी चिंताओं को भी उठाया गया।
इल्तिजा मुफ्ती ने गाड़ी के ऊपर से प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार पर रिपोर्ट जारी करने में देरी का आरोप लगाया और कहा कि यह मुद्दा सीधे तौर पर छात्रों और नौकरी के उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने मांग की कि सिफारिशों को गोपनीय रखने के बजाय सार्वजनिक किया जाए। समाचार एजेंसी ‘कश्मीर न्यूज़ ट्रस्ट’ के अनुसार, इल्तिजा मुफ्ती ने यह भी आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियां “बेची” जा रही हैं और उन्होंने भर्ती और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए।
सरकारी भर्ती और प्रोफेशनल कोर्स में दाखिले के लिए कोटा के ढांचे पर चल रही बहस के बीच आरक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग उठी है। ओपन-मेरिट उम्मीदवारों के विरोध और उनके द्वारा अपनी बात रखे जाने के बाद, उमर अब्दुल्ला सरकार ने दिसंबर 2024 में इस मुद्दे की जांच के लिए कैबिनेट सब-कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी की अध्यक्षता स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने की थी और इसमें मंत्री जावेद अहमद राणा और सतीश शर्मा भी शामिल थे।
बाद में कमेटी ने अपनी सिफारिशें मंत्रिपरिषद को सौंप दीं। सरकार का कहना है कि सिफारिशों को तय मंजूरी प्रक्रिया से गुज़ारा गया है, जबकि रिपोर्ट की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। आरक्षण पर बहस मुख्य रूप से ओपन-मेरिट उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध हिस्से और मौजूदा EWS कोटे पर केंद्रित रही है। कमेटी की सिफारिशों पर आई रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि EWS आरक्षण को 10 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत और RBA आरक्षण को 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है, और कुल मिलाकर 10 प्रतिशत हिस्सा ओपन-मेरिट कोटे में जोड़ने का प्रस्ताव है।
सटीक सिफारिशों को आधिकारिक तौर पर पूरी तरह से सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह मुद्दा राजनीतिक रूप से विवादित बना हुआ है; ओपन-मेरिट ग्रुप्स लगातार कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और आरक्षण के ढांचे की समीक्षा करने की मांग कर रहे हैं। इल्तिजा मुफ़्ती ने सवाल उठाया कि रिपोर्ट अभी तक जारी क्यों नहीं की गई है, साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर में रोज़गार और भर्ती को लेकर भी चिंता जताई। PDP का यह विरोध सरकार के उस रुख के बीच हो रहा है जिसमें कहा गया है कि आरक्षण का प्रस्ताव कैबिनेट की प्रक्रिया से गुज़र चुका है और इस पर केंद्रीय स्तर पर और विचार-विमर्श की ज़रूरत है।

