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Jammu Kashmir: मेट्रो लाइट के लिए केंद्र को भेजी रिपोर्ट, हरी झंडी का इंतजार, 22 स्टेशन हुए प्रस्तावित

जम्मू कश्मीर डेस्कः जम्मू शहर में बनतालाब से बाड़ी ब्राह्मणा तक तथा श्रीनगर में इंदिरा नगर से एचएमटी तक मेट्रो लाइट ट्रेन के संचालन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्र सरकार को भेज दी गई है। अब केवल मंजूरी का इंतजार है। बजट आवंटित होते ही परियोजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा।

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यह जानकारी मंत्री सकीना इत्तू ने अखनूर से भाजपा विधायक मोहन लाल शर्मा के सवाल के जवाब में दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल मेट्रो योजना में अखनूर को शामिल नहीं किया गया है, हालांकि भविष्य में केंद्र सरकार की सहमति से इस पर विचार किया जा सकता है। मंत्री ने बताया कि जम्मू शहर में बनतालाब से बाड़ी ब्राह्मणा तक 23 किलोमीटर लंबे रूट के लिए मेसर्स राइट्स लिमिटेड के माध्यम से डीपीआर तैयार की गई है। इस परियोजना के लिए 29.58 हेक्टेयर स्थायी और 1.5 हेक्टेयर अस्थायी भूमि की आवश्यकता होगी। इस रूट पर 22 स्टेशन प्रस्तावित हैं और वर्ष 2035 तक प्रतिदिन लगभग 2.84 लाख यात्रियों के सफर करने की संभावना है। श्रीनगर में भी इंदिरा नगर से एचएमटी चौक तक लाइट मेट्रो के लिए डीपीआर तैयार की जा चुकी है।

विधानसभा में पेश ऑडिट रिपोर्टों में खुलासे

जम्मू-कश्मीर सरकार से संबंधित आठ ऑडिट रिपोर्टें, जिन्हें भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने तैयार किया, हाल ही में विधानसभा में पेश की गईं। इन रिपोर्टों में विभिन्न विभागों में वित्तीय अनियमितताओं और कार्यप्रणाली की कमियों का खुलासा हुआ है। अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट) ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि जांच के दौरान कई स्थानों पर बिना स्वीकृति के कार्य शुरू कर दिए गए और निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। कई परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं, जबकि कुछ मामलों में लागत में भी वृद्धि दर्ज की गई।

शामलात भूमि पर चल रहे निजी स्कूलों को राहत

प्रदेश सरकार ने सरकारी (शामलात) भूमि पर संचालित निजी स्कूलों को राहत देते हुए उनके पंजीकरण की अवधि एक वर्ष के लिए बढ़ा दी है। यह निर्णय उस समय लिया गया है जब इन स्कूलों को भूमि उपयोग को लेकर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने विधानसभा में यह जानकारी दी। वे विधायक जस्टिस हसनैन मसूदी द्वारा शैक्षणिक संस्थानों के लिए उपयोग में लाई जा रही शामलात भूमि को नियमित करने के प्रस्ताव के जवाब में बोल रही थीं। मसूदी ने मांग की कि भूमि स्वामित्व से जुड़े विवादों के बावजूद शैक्षणिक संस्थानों को वर्तमान परिसरों में बिना किसी बाधा के कार्य करने की अनुमति दी जाए।

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