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साइंस और टेक्नोलॉजी की पहल की प्रगति की समीक्षा, वादे को दोहराया

Review of science and technology initiatives : श्रीनगर। खाद्य, सिविल सप्लाई और कंज्यूमर अफेयर्स, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, यूथ सर्विसेज़ और स्पोर्ट्स और साइंस और टेक्नोलॉजी मिनिस्टर, सतीश शर्मा ने आज जम्मू-कश्मीर में लागू किए जा रहे मुख्य रिन्यूएबल एनर्जी, साइंस और टेक्नोलॉजी की पहल की प्रोग्रेस का रिव्यू किया, और जम्मू-कश्मीर में सस्टेनेबल डेवलपमेंट, क्लीन एनर्जी अपनाने और साइंटिफिक इनोवेशन को तेज़ करने के लिए सरकार के कमिटमेंट को दोहराया।

JAKEDA की परियोजनाओं का रिव्यू

मिनिस्टर ने साइंस और टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट, जम्मू और कश्मीर एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (JAKEDA) और जम्मू और कश्मीर साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन काउंसिल (JKSTIC) द्वारा चलाए जा रहे फ्लैगशिप प्रोग्राम का डिटेल में रिव्यू किया, जिसमें सरकारी बिल्डिंग्स का रूफटॉप सोलराइजेशन, छोटे हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स, PM-KUSUM इम्प्लीमेंटेशन, बायोटेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और साइंस आउटरीच इनिशिएटिव शामिल हैं। मीटिंग में कमिश्नर/सेक्रेटरी साइंस और टेक्नोलॉजी बबीला रकवाल, CEO JAKAEDA पी.आर.धर और दूसरे सीनियर ऑफिसर मौजूद थे। सरकारी इमारतों के सोलराइज़ेशन प्रोग्राम के तहत प्रोग्रेस का रिव्यू करते हुए, सतीश शर्मा ने CAPEX और RESCO मॉडल के तहत दर्ज शानदार कामयाबियों पर खुशी जताई।

सोलराइजेशन में J&K देश में तीसरे स्थान पर

उन्हें बताया गया कि 8,181 सरकारी इमारतों को पहले ही सोलराइज़ किया जा चुका है, जिनकी कुल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 85.8 MW है। इससे सरकारी इमारतों को सोलराइज़ करने के मामले में जम्मू और कश्मीर देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तीसरे नंबर पर आ गया है। मंत्री को बताया गया कि CAPEX मोड के तहत, 5,600 सरकारी इमारतों के लिए 65 MW कैपेसिटी दी गई है, जिनमें से 3,388 इमारतों को पहले ही 46.8 MW की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी के साथ सोलराइज़ किया जा चुका है। इसके अलावा, 1,462 इमारतों के लिए मटीरियल पहले ही सप्लाई किया जा चुका है, जबकि दूसरी 800 इमारतों में इंस्टॉलेशन का काम चल रहा है। RESCO मोड के तहत, लगभग 8,000 सरकारी इमारतों को कवर करते हुए 175 MW की टारगेट कैपेसिटी के साथ काम आगे बढ़ रहा है, और 1,360 इमारतों के लिए वर्क ऑर्डर पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

क्लीन एनर्जी पर मंत्री का जोर

इस उपलब्धि को जम्मू और कश्मीर की क्लीन एनर्जी यात्रा में एक अहम पड़ाव बताते हुए, सतीश शर्मा ने कहा कि कार्बन एमिशन कम करने, बिजली की लागत कम करने और सरकारी संस्थानों को एनर्जी एफिशिएंट बनाने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना बहुत ज़रूरी है।

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