Last Updated: September 26, 2026

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J&K के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मैटरनिटी लीव पर रुकी सैलरी का मुद्दा गरमाया, IMA JDN ने उठाई आवाज

August 12, 2026

J&K के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मैटरनिटी लीव पर रुकी सैलरी का मुद्दा गरमाया, IMA JDN ने उठाई आवाज

श्रीनगर: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क (IMA JDN) J&K ने हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट और संबंधित सरकारी मेडिकल कॉलेजों से अपील की है कि वे मैटरनिटी लीव लेने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों की रोकी गई सैलरी और अलाउंस तुरंत जारी करें।

डॉक्टरों की बॉडी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर सीनियर अधिकारियों से बात कर रही है और अब हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन मिनिस्टर सकीना इटू से दखल देने की मांग की है ताकि यह पक्का किया जा सके कि एलिजिबल रेजिडेंट डॉक्टरों को अपनी मैटरनिटी लीव का हक इस्तेमाल करने के लिए पैसे की दिक्कत न हो।

IMA JDN J&K के को-कन्वीनर डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने कहा, “हम इस मामले में लगातार हायर अधिकारियों के साथ फॉलो-अप कर रहे थे। हमारी बार-बार कोशिशों के बावजूद, मैटरनिटी लीव पर रेजिडेंट डॉक्टरों को सैलरी न मिलने की चिंता बनी रही। हाई कोर्ट के ऑर्डर ने अब इस मुद्दे को साफ तौर पर सुलझा दिया है।”

डॉक्टरों ने उठाया सवाल
डॉ. खान ने सवाल किया कि जम्मू और कश्मीर के कुछ सरकारी मेडिकल कॉलेज अभी भी मैटरनिटी लीव लेने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों की सैलरी क्यों रोक रहे हैं या देरी कर रहे हैं, जबकि इस मामले पर कोर्ट के निर्देश हैं।

IMA JDN J&K के कन्वीनर डॉ. राकेश कौल और जनरल सेक्रेटरी डॉ. बुरहान अली ने भी इस मांग का समर्थन किया और संबंधित अधिकारियों से इन निर्देशों को लागू करने और यह पक्का करने की अपील की कि मैटरनिटी लीव लेने के लिए रेजिडेंट डॉक्टरों को पैसे की तंगी या प्रोफेशनल नुकसान न हो।

मेडिकल कॉलेजों में एक जैसी पॉलिसी की मांग
संगठन ने जम्मू-कश्मीर के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एक जैसी पॉलिसी की मांग की है और कहा है कि योग्य डॉक्टरों को बिना किसी देरी के उनकी बकाया सैलरी और अलाउंस मिल जाने चाहिए।

एसोसिएशन ने कहा, “मैटरनिटी लीव एक जायज़ हक है। रेजिडेंट डॉक्टरों को इस हक का इस्तेमाल करने के लिए पैसे की परेशानी नहीं होनी चाहिए।”

कोर्ट ने फैसले को किया रद्द
यह मामला डॉ. सोनाक्षी गुप्ता और अन्य के मामले में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के एक फैसले से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने मैटरनिटी लीव के दौरान रेजिडेंट डॉक्टरों को सैलरी और अलाउंस देने से मना करने के फैसले को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि मैटरनिटी लीव के दौरान डॉक्टरों को “आउट ऑफ असाइनमेंट” मानना ​​और उनके पैसे के फायदे रोकना, उन्हें मां बनने के लिए सज़ा देने जैसा है।

निर्देश पूरी तरह हो लागू
IMA JDN J&K ने अधिकारियों से फैसले पर कार्रवाई करने और यह पक्का करने की अपील की है कि इसके निर्देशों को पूरी तरह से लागू किया जाए।

डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने कहा, “कोर्ट के आदेशों को लागू किया जाना चाहिए। न्याय सिर्फ़ कागज़ पर नहीं रह सकता।”

📍 Location: Srinagar (Srinagar)

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