जम्मू ShivSena: जम्मू के प्रति उदासीनता और विश्वासघात का दौर- 2 जारी है, हमारी संस्कृति, पहचान को बचाने, देशी-विदेशी निवेश लाने या विकास, रोजगार, व्यापार को बढ़ावा देने के दावे सब खोखले साबित हुए हैं। जम्मू के तथाकथित ठेकेदार व हितैषी अंधभक्ति की अफीम चाट कर धुत्त पडे है, यह कहना है, शिवसेना (यूबीटी), जम्मू-कश्मीर ईकाई प्रमुख, मनीश साहनी का। पार्टी प्रदेश कार्यालय में आयोजित आज एक पत्रकार वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष मनीश साहनी ने कहा कि वर्ष 2014 में जम्मू के साथ भेदभाव का मुद्दा उठाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली भाजपा की 2014 से केंद्र में सरकार होने व 6 सालों से जम्मू-कश्मीर के केन्द्र शासित प्रदेश होने के बावजूद जम्मू के प्रति उदासीनता और विश्वासघात का दौर थमा नहीं है।
वर्ष 2014 में रेल मार्ग के कटरा तक के विकास व अधिकांश रेलगाड़ियों का कटड़ा तक पहुचाना , 2021 में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 152 साल पुरानी दरबार मूव प्रथा को बंद कर जम्मू के व्यापार की कमर तोड़ कर रख दी थी। जानकारी के अनुसार अस्पताल को ऐसी जमीन आबंटित कर दी जाती है, जिस पर मालिकाना हक को लेकर मामला 2019 से माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। वही युवाओं को रोजगार के अवसर के तहत देशी-विदेशी निवेश के दावे भी खोखले साबित हुए हैं। जम्मू शहर के मध्य में प्रदर्शनी मैदान में लगभग 48 कनाल प्रमुख भूमि विशेष रूप से एफडीआई परियोजनाओं के लिए निर्धारित की गई थी, जिसपर एक इंच भी प्रगति नहीं हुई है। जम्मू-श्रीनगर के बीच रेलगाड़ी चलने का इंतजार भी लगातार लंबा खिचता जा रहा है।
वहीं प्राकृतिक आपदा से परभावित जम्मू संभाग के लिए (लगभग डेढ़ महीने बीतने के बावजूद) किसी राहत पैकेज की घोषणा नहीं की गई। जम्मू में व्यापार का बंटाधार हो चुका है। रोजगार नहीं मिलने से युवा निराश होकर नशे के आदी हो रहे है। अपराध, चोरी, नशाखोरी का बोलबाला है। मंदिरों का शहर जम्मू, नशाखोरी व मिदरा का शहर बन चुका है। साहनी ने अंधभक्ति में डूबे जम्मू के विश्वासघातियों को होश में आने की चेतावनी व जनता से जम्मू की असमिता को बचाने के लिए शिवसेना का साथ देने की यलगार लगाई है । इस मौके पर अदित्य महाजन (सचिव) , जसबीर सिंह (सह सचिव) उपस्थित रहे।

