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Jammu Kashmir News: कठुआ रेलवे स्टेशन पर गोलीबारी की घटना, RPF जवान घायल

Kathua railway station

Kathua railway station

जम्मू कश्मीर डेस्कः जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में रविवार को रेलवे स्टेशन पर गोलीबारी की घटना में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) का एक जवान घायल हो गया। अधिकारियों ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर गोली लगने से जवान घायल हो गया। पुलिस ने पुष्टि की है कि घायल जवान को तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। इस बीच, पुलिस और रेलवे अधिकारियों ने घटना का संज्ञान लिया है।

आरपीएफ को विशेष रूप से केंद्र शासित प्रदेश के कठुआ से बारामूला जिले तक विभिन्न रेलवे स्टेशनों और रेल ट्रैक पर ट्रेनों, यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैनात किया गया है। आरपीएफ भारत का केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है जो रेलवे संपत्ति, यात्रियों और यात्री क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, जो सुरक्षा सुनिश्चित करने, अपराधों को रोकने और यात्रियों की सहायता करने, जिसमें बच्चों को बचाना और तस्करी से लड़ना शामिल है, के लिए रेल मंत्रालय के तहत काम करता है।

आरपीएफ के मुख्य कार्यों में ‘ऑपरेशन अमानत (खोया और पाया)’ और ‘मेरी सहेली (महिलाओं की सुरक्षा)’ जैसी पहलों के माध्यम से यात्रियों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। रेलवे संपत्तियों को नुकसान या चोरी से बचाना और रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम और एनडीपीएस अधिनियम (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट) जैसे कानूनों को लागू करना।

इसके अलावा, आरपीएफ आपात स्थितियों के दौरान सहायता प्रदान करता है, घायलों की मदद करता है और खोए हुए व्यक्तियों को बचाता है। यह संघ का एक सशस्त्र बल है, जिसे रेलवे सुरक्षा बल अधिनियम, 1957 द्वारा स्थापित किया गया है। यह राज्य पुलिस के साथ काम करता है लेकिन रेलवे सुरक्षा के लिए इसके पास विशिष्ट शक्तियां हैं।

सुरक्षा बल के पास रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम 1966 और रेलवे अधिनियम 1989 (समय-समय पर संशोधित) के तहत किए गए अपराधों की तलाशी लेने, गिरफ्तार करने, पूछताछ करने और मुकदमा चलाने की अधिकार है। आरपीएफ को 2004 से रेलवे यात्री क्षेत्र और रेलवे यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। हालांकि, अन्य दंड कानूनों के तहत गिरफ्तारी की शक्ति प्रत्येक राज्य की सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के हाथों में है।

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