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सिन्हा ने पश्मीना अवार्ड्स के प्राप्तकर्ताओं को किया सम्मानित

October 21, 2023

सिन्हा ने पश्मीना अवार्ड्स के प्राप्तकर्ताओं को किया सम्मानित

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को श्रीनगर में पश्मीना एक्सपोर्टर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन अवार्ड्स के प्राप्तकर्ताओं को सम्मानित किया। अपने संबोधन में उपराज्यपाल ने पुरस्कार विजेताओं को प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करने पर बधाई दी। उन्होंने पश्मीना उत्पादों को बढ़ावा देने में अपार योगदान के लिए पश्मीना एक्सपोर्टर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की भी सराहना की। उन्होंने पश्मीना उद्योग के पुनरुद्धार के लिए यूटी प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई।

श्री सिन्हा ने कहा कि पश्मीना हमारी सांस्कृतिक विरासत की अभिव्यक्ति है। यह जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में भी योगदान देता है और बुनकरों और कारीगरों के बड़े वर्ग को सशक्त बनाता है। उच्च गुणवत्ता वाले पश्मीना उत्पादों के उत्पादन में अपनी पारंपरिक विशेषज्ञता के कारण कश्मीर को दुनिया की पश्मीना राजधानी के रूप में जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में उछाल और जी20 शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन से जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की मांग बढ़ी है। उपराज्यपाल ने कहा, हम इस क्षेत्र के विकास के लिए बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण और वित्त के मामले में कारीगरों को आवश्यक समर्थन और सहायता दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र ने पश्मीना उत्पादों को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया है। यह कानूनी मान्यता पश्मीना वस्तुओं की प्रामाणिकता की रक्षा करने में मदद करती है और यह सुनिश्चित करती है कि केवल कश्मीर जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में बने उत्पादों को नकली उत्पादों और नकली उत्पादों को हतोत्साहित करने के लिए ‘पश्मीना’ नाम दिया जा सकता है।

उन्होंने कहा,‘‘चांगथांगी बकरियों की आबादी के संरक्षण और सुधार के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं, जो पश्मीना ऊन का स्रोत हैं। इन प्रयासों में प्रजनन कार्यक्रम, पशुपालन प्रथाओं में सुधार और बकरियों के लिए स्थायी चरागाह क्षेत्र बनाना शामिल है।’’ गौरतलब है कि सरकार और अन्य संगठन वास्तविक पश्मीना उत्पादों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के अभियान में लगे हुए हैं। प्रमोशन पश्मीना के सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व और प्रामाणिक वस्तुओं को खरीदने के महत्व पर प्रकाश डालते हैं।

उपराज्यपाल ने कहा,‘‘पश्मीना सिर्फ एक कपड़ा नहीं है। यह कश्मीरी संस्कृति और विरासत का प्रतीक है। यह जम्मू कश्मीर के सांस्कृतिक ताने-बाने में गहराई से बुना हुआ है। इसका महत्व आर्थिक क्षेत्र से परे सांस्कृतिक, सामाजिक और पर्यावरणीय पहलुओं तक फैला हुआ है, जो इसे जम्मू-कश्मीर की पहचान और जीवन शैली का एक पोषित और अभिन्न अंग बनाता है।’’ उपराज्यपाल ने 18 पहचाने गए व्यापारों में लगे केंद्र शासित प्रदेश के कारीगरों और शिल्पकारों के जीवन को बदलने के लिए पात्र कारीगरों को पीएम विश्वकर्मा योजना से जोड़ने के लिए क्षेत्र से जुड़े संघों और हितधारकों से आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन कारीगरों को उन्नत विपणन अवसर और वैश्विक बाजार तक पहुंच प्रदान करने के लिए प्रगति मैदान में प्रदर्शनी के दौरान स्टालों और दुकानों की संख्या में वृद्धि भी सुनिश्चित करेगा। केंद्र शासित प्रदेश के कारीगरों को सोजनी क्राफ्ट और कानी शॉल श्रेणियों में मास्टर और युवा कारीगरों में प्रशंसा प्रमाण पत्र और नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। गुलाम हसन शेरा को मरणोपरांत लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान किया गया। डॉ. हिना शफी भट, उपाध्यक्ष, जम्मू-कश्मीर केवीआईबी; डॉ अरुण कुमार मेहता, मुख्य सचिव; श्री विक्रमजीत सिंह, आयुक्त सचिव उद्योग एवं वाणिज्य; पश्मीना एक्सपोर्टर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री तारिक डार, यूटी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, कारीगर और शिल्पकार उपस्थित थे।

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