Site icon Dainik Savera Times

उधमपुर में पुल गिरने के बाद जान जोखिम में डाल नदी पार कर रहे छात्र, लोगों ने की सरकार से ये मांग

जम्मू कश्मीर डेस्कः अगस्त 2025 में तवी नदी पर बना एक महत्वपूर्ण मोटरेबल पुल बह जाने के बाद उधमपुर ज़िले में हज़ारों छात्रों की पढ़ाई और सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। पुल के टूटने के कारण 10 से अधिक पंचायतों के बच्चों को अपने स्कूल जाने के लिए खतरनाक तोल्डी नाला पैदल पार करना पड़ रहा है। समरोली के बंट गांव क्षेत्र में बना यह पुल लगभग 20 गांवों के लिए एक अहम संपर्क मार्ग था।

ये भी पढ़ें :-

भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ में इसके बह जाने के बाद से स्कूली बच्चे खासकर छोटी लड़कियां और प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थी रोज फिसलन भरी चट्टानों और तेज़ बहाव वाले पानी के बीच से होकर गुजरने को मजबूर हैं। उनका स्कूल जाना अब केवल पढ़ाई का नहीं, बल्कि रोज़ अपनी जान जोखिम में डालने जैसा बन गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल टूटने से 50,000 से अधिक लोग उधमपुर ज़िला मुख्यालय से पूरी तरह कट गए हैं, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और दैनिक ज़रूरतों तक पहुंच बुरी तरह प्रभावित हुई है। ग्रामीणों और छात्रों ने केंद्र सरकार, जम्मू-कश्मीर प्रशासन और ज़िला प्रशासन से पुल के पुनर्निर्माण के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की है।

उधमपुर के अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) प्रेम सिंह चिब ने जानकारी दी कि 80 मीटर लंबा तोल्डी-बंत मोटरेबल पुल अगस्त 2025 के अंत में आई बाढ़ में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। सितंबर 2025 में डिज़ाइन, इंस्पेक्शन और क्वालिटी कंट्रोल (DIQC) टीम द्वारा किए गए विस्तृत निरीक्षण में पाया गया कि केवल मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी। नदी का जलमार्ग बदल चुका है और उच्च बाढ़ स्तर (HFL) भी प्रभावित हुआ है, जिससे पुल को नए सिरे से डिज़ाइन करना आवश्यक हो गया है।

इस कारण परियोजना का दायरा और लागत दोनों बढ़ गए हैं। पहले UT Capex 2025–26 के तहत पुल की मरम्मत के लिए लगभग 4.50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन नए डिज़ाइन के अनुसार पुल की लंबाई 80 मीटर से बढ़ाकर 98 मीटर करनी होगी। इससे परियोजना की कुल लागत बढ़कर लगभग 5.4 करोड़ रुपये हो गई है।

ADC चिब ने बताया कि संशोधित प्रस्ताव मंज़ूरी के लिए उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। बजट और डिज़ाइन स्वीकृत होते ही प्रशासन टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा, ताकि इस महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। इसके बावजूद, गांवों के लोग और छात्र आज भी रोज़ जोखिम उठाकर तोल्डी नाला पार करने को मजबूर हैं। उन्होंने प्रशासन से प्रक्रिया में तेजी लाने और किसी भी संभावित हादसे से बचने के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की अपील की है।

ये भी पढ़ें :-

Exit mobile version