
जम्मू/श्रीनगर : मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने बुधवार को राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति का जायजा लिया। बैठक में बताया गया कि जम्मू-कश्मीर ने अभियान के तहत चिन्हित सभी उच्च जोखिम वाले गांवों में गहन टीबी जांच अभियान चलाकर शत-प्रतिशत भौगोलिक कवरेज का लक्ष्य हासिल कर लिया है। बैठक में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, शेर-ए-कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक, सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों के प्राचार्यों, स्वास्थ्य सेवा निदेशकों तथा विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भाग लिया।
मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए सतत निगरानी, समय पर पहचान और बिना रुकावट उपचार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी जिलों को प्रत्येक टीबी रोगी के संपर्क में आए लोगों की प्रभावी जांच सुनिश्चित करने और संक्रमित पाए जाने पर तुरंत उपचार शुरू कराने के निर्देश दिए। उन्होंने टीबी मुक्त भारत अनुप्रयोग से जुड़े खुशी चैटबॉट के व्यापक उपयोग पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि यह मंच रोगियों को सही जानकारी, उपचार संबंधी मार्गदर्शन और परामर्श उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध जानकारी से लोगों में जागरूकता बढ़ रही है तथा उपचार के प्रति विश्वास भी मजबूत हो रहा है। बैठक में बताया गया कि अभियान के दूसरे चरण के तहत अब तक उच्च जोखिम वाले गांवों में रहने वाले 6.85 लाख लोगों की टीबी जांच की जा चुकी है।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त सचिव एम. राजू ने बताया कि 1,518 चिन्हित गांवों में 1,525 निक्षय शिविर आयोजित कर पूरे क्षेत्र को अभियान से आच्छादित किया गया है। दूरदराज क्षेत्रों में जांच व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 11 नए हाथ में ले जाने योग्य डिजिटल एक्स-रे उपकरण रियासी, डोडा, राजौरी, रामबन, बारामूला, श्रीनगर और कुपवाड़ा सहित कई जिलों में उपलब्ध कराए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप छाती के एक्स-रे की संख्या 1.72 लाख से बढ़कर 3.15 लाख से अधिक हो गई है और जांच कवरेज लगभग 79 प्रतिशत तक पहुंच गई है। समीक्षा में बताया गया कि अब तक 95,810 सूक्ष्म जैविक जांचें की जा चुकी हैं, जिनमें से 91 प्रतिशत त्वरित आणविक जांच पद्धति के माध्यम से संपन्न हुई हैं।
वहीं, टीबी निरोधक उपचार के दायरे में आने वाले पात्र पारिवारिक संपर्कों की संख्या 34 प्रतिशत से बढ़कर 65 प्रतिशत हो गई है। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि 3,930 टीबी रोगियों को पोषण किट उपलब्ध कराई गई हैं और इसका वितरण 54.5 प्रतिशत से बढ़कर 86 प्रतिशत तक पहुंच गया है। कई जिलों में पात्र लाभार्थियों को लगभग शत-प्रतिशत पोषण सहायता प्रदान की जा रही है। समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में केंद्र शासित प्रदेश में 3.19 लाख से अधिक संभावित टीबी जांचें की गई हैं, जो राष्ट्रीय मानक से कहीं अधिक हैं। साथ ही, जनवरी से जून 2026 के दौरान निक्षय पोर्टल पर दर्ज 88 मौतों की विस्तृत जांच में किसी भी मृत्यु को प्रत्यक्ष रूप से टीबी से संबंधित नहीं पाया गया, जो रोग की समय पर पहचान और बेहतर उपचार व्यवस्था का सकारात्मक परिणाम है।
बैठक में यह भी बताया गया कि विभेदित टीबी देखभाल के तहत नि:शुल्क जांच की योजना को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से 117 लाख रुपये की वित्तीय सहायता सहित मंजूरी मिल चुकी है। साथ ही, अभियान की निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ब्लॉक स्तर की समितियों के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार समन्वित प्रयासों, जनभागीदारी, आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से टीबी मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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