Three Convicted in Tasleema Murder Case; Two Women Acquitted : श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर की एक अदालत ने दहेज से जुड़े हत्या के मामले में मृतका तस्लीमा के पति, सास और देवर को दोषी ठहराया है। अदालत ने 13 अक्टूबर को सुनाए फैसले में शाहनवाज अहमद डार, हफीजा बेगम और परवेज अहमद डार उर्फ बिलाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 और 120-B के तहत दोषी करार दिया।
जून 2022 में तस्लीमा बेमिना स्थित अपने घर में मृत पाई गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने को मौत का कारण बताया गया। अभियोजन पक्ष के 23 गवाहों के बयान और मेडिकल साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया। वहीं, पर्याप्त सबूतों के अभाव में दो अन्य महिला आरोपियों को बरी कर दिया गया। अदालत ने दोषियों की सजा निर्धारित करने के लिए अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 को तय की।
जून 2022 में तस्लीमा अपने बेमिना स्थित घर में मृत पाई गई थी। वहीं, पुख्ता सबूत न होने के कारण दो अन्य महिला आरोपियों को बरी कर दिया गया। यह फैसला 13 अक्टूबर को श्रीनगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सुनाया। यह मामला बातामालू पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 109/2022 से जुड़ा है, जिसमें IPC की धारा 498-A, 302, 120-B और 201 के तहत आरोप लगाए गए थे। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि शाहनवाज अहमद डार की पत्नी तस्लीमा को शादी के नौ साल बाद भी बच्चा न होने के कारण मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटने (सांस रुकने) को बताया गया और यह स्पष्ट किया गया कि चोटें खुद से नहीं पहुंचाई गई थीं। अभियोजन पक्ष के 23 गवाहों के बयानों के बाद, कोर्ट ने माना कि मेडिकल सबूतों से यह साबित होता है कि गला घोंटकर या दम घोंटकर हत्या की गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि तीनों आरोपी मृतका को लगी जानलेवा चोटों के बारे में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए। हालांकि, साजिश साबित करने के लिए पेश किए गए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया, लेकिन आरोपियों के बर्ताव और आसपास की परिस्थितियों से साजिश का अनुमान लगाया गया।
IPC की धारा 201 (सबूत मिटाने या अपराधी को बचाने) के तहत लगा आरोप साबित नहीं हो सका। कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए सुमिया और सायका को सभी आरोपों से बरी कर दिया। हफीजा बेगम (सास), परवेज अहमद डार उर्फ बिलाल (देवर) और शाहनवाज अहमद डार (पति) को IPC की धारा 302 और 120-B के तहत दोषी ठहराया गया है। अदालत ने ज़मानत पर चल रही हफीज़ा बेगम को हिरासत में लेने का आदेश दिया और जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे सज़ा तय करने के लिए तीनों दोषियों को अदालत में पेश करें। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर, 2026 को तय की गई है।

