जम्मू: प्रस्तावित वैष्णो देवी रोपवे परियोजना को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा को सूचित किया कि परियोजना को मंजूरी उनके मंत्रिमंडल ने नहीं बल्कि उपराज्यपाल द्वारा दी गई थी। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नैशनल कांफ्रैंस (नैकां) के विधायक नजीर अहमद गुरेजी और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने भाजपा विधायक बलदेव राज शर्मा से इस मुद्दे पर सदन को ‘गुमराह’ करने के आरोप में इस्तीफा देने की मांग की।
इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए अब्दुल्ला ने सदन को सूचित किया कि शर्मा ने रोपवे को उनके मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने का दावा किया था, जिसके बाद उन्होंने रिकॉर्ड की जांच की। मुख्यमंत्री ने कहा, मैंने प्रासंगिक दस्तावेजों की तलाश करके तथ्यों को सत्यापित करने का प्रयास किया। मैंने यह जांच की कि क्या मंत्रिमंडल द्वारा कोई अनुमोदन दिया गया था और ऐसा कोई अनुमोदन नहीं था।
मुख्यमंत्री ने कहा, मैंने तब पता लगाया कि उपराज्यपाल के समक्ष उनकी यात्र के दौरान सितंबर 2024 में इस मुद्दे को रखा गया था और उन्होंने सक्षम प्राधिकारी होने के नाते इसे मंजूरी दे दी थी। यह मंजूरी सरकार गठन से लगभग एक महीने पहले दी गई थी। इस मामले को मंत्रिमंडल ने कोई मंजूरी नहीं
दी है।