Last Updated: November 6, 2026

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2019 से विदेशी मेहमानों के दौरे तयशुदा : महबूबा

August 20, 2026

2019 से विदेशी मेहमानों के दौरे तयशुदा : महबूबा

Visits by foreign guests scheduled from 2019 onwards : श्रीनगर। PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने जम्मू-कश्मीर आने वाले विदेशी प्रतिनिधियों के दौरों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 2019 के बाद से ऐसे दौरे सीमित और तयशुदा रहे हैं और विदेशी मेहमानों को समाज के विभिन्न वर्गों से मिलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता।

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के कश्मीर दौरे और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ उनकी मुलाक़ात पर प्रतिक्रिया देते हुए महबूबा ने कहा कि इलाके में आने वाले विदेशी प्रतिनिधियों को सत्ताधारी लोगों तक सीमित रहने के बजाय समाज के अलग-अलग वर्गों से मिलवाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2019 से पहले, कश्मीर आने वाले विदेशी मेहमान अलग-अलग राय और समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों से मिलते थे, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि यह चलन बदल गया है। महबूबा ने अमेरिकी राजदूत के साथ मुलाक़ात के दौरान कश्मीर के मौजूदा हालात का ज़िक्र न करने के लिए उमर की भी आलोचना की।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को गोर को उस ‘दमघोंटू माहौल’ के बारे में बताना चाहिए था, जिसका ज़िक्र उन्होंने अभिव्यक्ति की आज़ादी पर पाबंदियों, संपत्तियों की ज़ब्ती और कर्मचारियों की बर्खास्तगी के संदर्भ में किया था। पिछली रात पुलवामा के करीमाबाद में हुई घटना का ज़िक्र करते हुए महबूबा ने दावा किया कि एक धार्मिक धर्मगुरु की पिटाई की गई और कुछ युवाओं को उठा लिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं की जानकारी भी राजदूत को दी जानी चाहिए थी। महबूबा ने कहा कि उमर का यह कहना सही था कि जम्मू-कश्मीर की समस्याओं का समाधान नई दिल्ली को करना है, लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि इससे उन्हें दौरे पर आए विदेशी राजनयिक को ज़मीनी हालात समझाने से नहीं रोका जा सकता था। उन्होंने कहा, “उमर ने किसी भी चीज़ के बारे में बात नहीं की,” और कहा कि मुख्यमंत्री को कश्मीर के हालात समझाने के लिए इस मौके का इस्तेमाल करना चाहिए था। उन्होंने अमेरिका से किसी भी तरह के दखल की मांग करने की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में अमेरिका को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए और ईरान में अमेरिकी दखल से हुई मौत और तबाही का ज़िक्र किया।

समाचार एजेंसी ‘कश्मीर न्यूज़ ट्रस्ट’ के अनुसार, महबूबा ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक ढांचे ने मुख्यमंत्री के पद से जुड़ी ताकत को कम कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने इस पद को ‘हेडमास्टर’ से बदलकर ‘मास्टर’ जैसा बना दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजदूत के साथ मुलाक़ात के दौरान उमर के रवैये ने इस पद की विश्वसनीयता को और कम कर दिया है। अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद के कार्यकाल का ज़िक्र करते हुए महबूबा ने याद दिलाया कि सिर्फ़ 16 विधायक होने के बावजूद, उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को जम्मू-कश्मीर के साथ बातचीत और भरोसा बढ़ाने वाले कदम उठाने के लिए राज़ी किया था। उन्होंने उस दौरान शुरू की गई पहलों के उदाहरण के तौर पर मुज़फ़्फ़राबाद-रावलकोट व्यापार मार्ग और मुग़ल रोड का ज़िक्र किया। साथ ही, महबूबा ने उम्मीद जताई कि अमेरिका के साथ जुड़ने से भविष्य में जम्मू-कश्मीर के लिए आर्थिक फ़ायदे हो सकते हैं, खासकर बागवानी जैसे क्षेत्रों में। उन्होंने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक जुड़ाव बढ़ता है, तो इससे बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा मिल सकता है और क्षेत्र के उत्पादकों के लिए नए मौके बन सकते हैं।

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