
इंटरनेशनल डेस्कः बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोगों की हत्याओं की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ताजा मामला सुनामगंज जिले का है, जहां गुरुवार को जॉय महापात्रो नामक एक हिंदू व्यक्ति की हत्या कर दी गई। परिजनों के अनुसार, एक स्थानीय व्यक्ति ने पहले महापात्रो की बेरहमी से पिटाई की और बाद में उन्हें जहर दे दिया। गंभीर हालत में उन्हें सिलहट उस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
यह घटना हाल के दिनों में हुई एक अन्य दर्दनाक घटना के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है। चोरी के शक में पीछा कर रही भीड़ से बचने के लिए 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार नहर में कूद गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। भंडारपुर गांव निवासी मिथुन सरकार का शव पुलिस ने मंगलवार दोपहर बरामद किया।
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दीपू चंद्र दास की लिंचिंग का मुख्य आरोपी गिरफ्तार
हाल के महीनों में बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा में तेजी देखी गई है। इसी क्रम में, गुरुवार को बांग्लादेश पुलिस ने हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की लिंचिंग के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। दीपू चंद्र दास एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करते थे और उन पर ईशनिंदा के आरोप लगाए गए थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान यासीन अराफात के रूप में हुई है, जो एक पूर्व शिक्षक है। माना जा रहा है कि उसने हमले की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई। 27 वर्षीय दीपू की 18 दिसंबर को मैमनसिंह जिले में हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि फैक्ट्री के सुपरवाइजरों ने पहले उनसे जबरन इस्तीफा दिलवाया, फिर उन्हें कार्यस्थल से बाहर घसीटकर एक उग्र स्थानीय भीड़ के हवाले कर दिया, जहां उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा के डरावने आंकड़े
पिछले साल दिसंबर 2025 में छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में हालात और अधिक बिगड़ते चले गए। इसके बाद देश के विभिन्न इलाकों से हिंदू समुदाय पर हमलों और हत्याओं की कई घटनाएं सामने आईं। दीपू चंद्र दास, अमृत मंडल और बजेंद्र बिस्वास की हत्याओं ने पूरे समुदाय में गहरी दहशत फैला दी। शरियतपुर जिले में एक हिंदू व्यापारी को भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डाले जाने की घटना ने हालात की भयावहता को उजागर कर दिया।
इन घटनाओं की पुष्टि बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के बयान से भी होती है। संगठन के अनुसार, अकेले दिसंबर महीने में सांप्रदायिक हिंसा की कम से कम 51 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें 10 हत्याएं, लूटपाट और आगजनी के 23 मामले, डकैती व चोरी की 10 घटनाएं, झूठे ईशनिंदा आरोपों में हिरासत और यातना के चार मामले, बलात्कार के प्रयास की एक घटना और शारीरिक हमलों के तीन मामले शामिल हैं।
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