इंटरनेशनल डेस्क: बांग्लादेश से अच्छी खबर सामने आई है। वहां की सरकार ने फैसला लिया है कि महान फिल्मकार सत्यजीत रे के पैतृक घर को नहीं गिराया जाएगा। सरकार ने मैमन सिंह स्थित उनके पैतृक आवास को गिराने का काम रोक दिया है। अब एक समिति का गठन किया गया है, जो सत्यजीत रे के पैतृक आवास का पुनर्निर्माण करवाने का काम करेगी। भारत सरकार ने सत्यजीत रे के आवास को गिराने के प्रयास का मामला सामने आने के बाद चिंता जाहिर की थी।
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी सत्यजीत रे का घर गिराए जाने की निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि यह घर बंगाल के सांस्कृतिक इतिहास की गहराइयों से जुड़ा है। इस घर के साथ सत्यजीत रे के दादा उपेंद्र किशोर रे चौधरी की यादें जुड़ी हैं, जिन्होंने यहां काफी लंबा समय बिताया था। उपेंद्र को बंगाल साहित्य की दुनिया में बड़ा नाम माना जाता है।
After concerns were raised by India, the demolition of legendary film-maker Satyajit Ray’s ancestral home in Bangladesh’s Mymensingh has been halted. The Bangladesh authorities have formed a panel to see how the house, which now has just a few walls left standing, can be… pic.twitter.com/E4P7J03tA1
— The Statesman (@TheStatesmanLtd) July 17, 2025
विदेश मंत्रालय ने जताई थी चिंता
हाल में कुछ खबरें सामने आई थीं, जिनमें बताया गया था कि बांग्लादेश सरकार सत्यजीत रे के पैतृक घर को गिराने जा रही है। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने चिंता जाहिर की थी। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि सरकार के स्वामित्व में यह संपत्ति आती है। इसको गिराने के आदेश देना दुख के समान है। इस संपत्ति की हालत बेहद खराब हो चुकी है। यह संपत्ति बांग्ला सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक मानी जाती है।
इसको गिराने का जो फैसला लिया गया है, उस पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। इसे साहित्य संग्रहालय में बदला जा सकता है। भारत सरकार मामले में हर तरह की मदद को तैयार है, इस साझा संस्कृति को सहेजे जाने की जरूरत है।
ममता ने जताई थी चिंता
बंगाल की सीएम ममता ने कहा था कि महान फिल्मकार के पैतृक घर को इस तरह गिराया जाना दुखद है। रे परिवार ने बंगाल की संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम किया है। मैं बांग्लादेश सरकार से अपील करती हूं कि इस विरासत को संरक्षित करने के लिए कदम उठाएं। भारत सरकार भी मामले को लेकर ध्यान दें। बांग्लादेश के अधिकारियों का कहना है कि इस जर्जर इमारत को संरक्षित करके अब सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनाया जाएगा।

