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‘अरावली रेंज की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध’, भूपेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

December 29, 2025

‘अरावली रेंज की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध’, भूपेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अरावली पहाड़ियों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले का स्वागत किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को दिए गए अपने पुराने आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। उस आदेश में केंद्र सरकार द्वारा तय की गई अरावली पहाड़ियों और अरावली रेंज की परिभाषा को माना गया था।

अरावली रेंज की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध

भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से खुश हैं, जिसमें अदालत ने अरावली से जुड़े मुद्दों का दोबारा अध्ययन करने के लिए एक नई विशेषज्ञ समिति (एक्सपर्ट कमेटी) बनाने का निर्देश दिया है। उन्होंने दोहराया कि पर्यावरण मंत्रालय अरावली रेंज की सुरक्षा और उसके संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और कोर्ट द्वारा मांगी गई हर मदद देगा। केंद्रीय मंत्री ने यह भी साफ किया कि अभी अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह की नई माइनिंग लीज़ देने या पुरानी माइनिंग लीज़ को नवीनीकरण करने पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है।

 

कांग्रेस ने भी फैसले का किया स्वागत

इस फैसले का कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उन्हें बहुत खुशी है। गहलोत ने कहा कि चार राज्यों और पूरे देश के लोगों ने अरावली को बचाने के लिए आंदोलन किया, सड़कों पर उतरे, मीडिया के जरिए अपनी बात रखी और अलग-अलग तरीकों से विरोध जताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब सरकार जनता की भावना को समझेगी।

अरावली की नई परिभाषा पर लगी रोक

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा तय की गई अरावली पहाड़ियों और अरावली रेंज की परिभाषा को मानने वाले अपने पहले के फैसले पर रोक लगा दी है। नवंबर में अगर यह फैसला लागू रहता, तो अरावली क्षेत्र के बड़े हिस्से में नियंत्रित तरीके से माइनिंग गतिविधियों की अनुमति मिलने की संभावना बन सकती थी।

अब सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जे.के. माहेश्वरी व जस्टिस ए.जी. मसीह शामिल हैं, ने आदेश दिया है कि अरावली की परिभाषा से जुड़े सभी अहम मुद्दों की जांच के लिए एक नई विशेषज्ञ समिति बनाई जाए।

केंद्र सरकार समेत इन राज्यों को नोटिस

इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार और अरावली से जुड़े चार राज्यों राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है। यह पूरा मामला कोर्ट अपने आप (सुओ मोटो) सुनवाई के तहत देख रही है। यह फैसला अरावली पहाड़ियों के संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

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