नेशनल डेस्क: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि बिहार में किसी भी वोटर का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने यह बात शनिवार को उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में एक निजी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के दौरान कही।
वोटर सबसे जरूरी, राजनीतिक दल बाद में
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मतदाता चुनाव आयोग के लिए सबसे अहम होते हैं, और इसके बाद राजनीतिक दलों की अहमियत होती है। उन्होंने यह साफ किया कि बिहार चुनाव की तैयारियां पहले से ही शुरू हो चुकी हैं और इसमें पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है।
विपक्ष के आरोपों को बताया निराधार
बिहार चुनाव को लेकर कुछ विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और नाम कटने का आरोप लगाया है, खासकर कोसी नदी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को लेकर। इस पर जवाब देते हुए ज्ञानेश कुमार ने कहा, “बिना पूरी जानकारी लिए आरोप लगाना सही नहीं है। चुनाव आयोग का हर आदेश सार्वजनिक होता है, और उसे पढ़कर चर्चा करनी चाहिए।”
2003 की वोटर लिस्ट होगी आधार
CEC ने कहा कि जिन लोगों का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में था, उन्हें मतदान के लिए योग्य माना जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन लोगों से कोई नया दस्तावेज या प्रमाण पत्र नहीं मांगा जाएगा। यहां तक कि उनके बच्चों से भी कोई कागजात नहीं मांगे जाएंगे। कोसी नदी क्षेत्र, जहां बाढ़ जैसी स्थितियां रहती हैं, वहां के लोगों की विशेष जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा।
5000 बैठकें, 28000 नेताओं से बातचीत
CEC ज्ञानेश कुमार ने यह भी बताया कि चुनाव आयोग ने बिहार में अब तक करीब 5000 बैठकें की हैं, जिनमें 28000 से ज्यादा राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए। इसका मकसद यह है कि सभी पक्षों को चुनाव प्रक्रिया की जानकारी दी जा सके और किसी तरह की गलतफहमी न रहे।
मतदाता सूची का काम कब होगा पूरा?
CEC के अनुसार, 24 जून से 15 जुलाई 2025 तक यानी 31 दिन के अंदर मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 2002 में भी इसी तरह गहन निरीक्षण किया गया था, और इस बार भी उसी प्रक्रिया को दोहराया जा रहा है।

