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BJP President Election: कैसे चुना जाता है BJP का अध्यक्ष, क्या RSS करता है हस्तक्षेप? जानें सब कुछ

BJP President Election

नेशनल डेस्क: भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जल्द अगला अध्यक्ष मिलने वाला है। इसके लिए कई नामों पर मंथन चल रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी भी 5 देशों की यात्रा से लौट चुके हैं। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा 2 साल से एक्सटेंशन पर चल रहे हैं। उनके कार्यकाल में बीजेपी ने कई राज्यों में हुए चुनावों में जीत दर्ज की है। बीजेपी का नया अध्यक्ष कैसे चुना जाता है, इसमें आरएसएस की क्या भूमिका होती है? इसके बारे में जानते हैं।

बीजेपी के संविधान के अनुसार अध्यक्ष का चुनाव निर्वाचक मंडल करता है। इसमें राष्ट्रीय और प्रदेश परिषद के मेंबर्स शामिल होते हैं। पार्टी का अध्यक्ष सिर्फ 15 साल या इससे ज्यादा एक्टिव व्यक्ति ही बन सकता है। पार्टी के निर्वाचक मंडल में से 20 सदस्य किसी नेता का नाम अध्यक्ष के लिए आगे कर सकते हैं। इस संयुक्त प्रस्ताव में राष्ट्रीय परिषद का चुनाव हो चुके 5 प्रदेशों का शामिल होना जरूरी है। नामांकन पत्र पर कैंडिडेट की मंजूरी जरूरी होती है।

सहमति से होता है चयन

बीजेपी भारत को 36 प्रांतों में डिवाइड करती है। जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय संगठन के चुनाव सबके लिए जरूरी होते हैं। आधे से ज्यादा राज्यों में चुनाव संपन्न होने के बाद ही नेशनल प्रेसिडेंट का चयन होता है। आमतौर पर इसे सर्वसम्मति से भी चुन सकते हैं। अभी तक बीजेपी ने कभी भी वोटिंग से अध्यक्ष नहीं चुना है। आपसी विचार-विमर्श से ऐसा होता रहा है। यही परिपाटी कांग्रेस की रही है।

RSS का दखल नहीं होता

बीजेपी संविधान के मुताबिक अध्यक्ष 3 साल के लिए चुना जाता है। 2010 में नितिन गडकरी अध्यक्ष बने थे, तब पार्टी ने संविधान में बदलाव किया था। इसके अनुसार कोई भी नेता लगातार 2 बार अध्यक्ष बन सकता है। आरएसएस व्यक्तिवाद के खिलाफ माना जाता है। माना जाता है कि वह संगठन को व्यक्ति विशेष से ज्यादा तरजीह देता है। इसलिए कहा जाता है कि वह अध्यक्ष के चयन में दखल नहीं देता।

अध्यक्ष की दौड़ में ये नेता

विनोद तावड़े, मनोहर लाल खट्टर, शिवराज सिंह चौहान, सुनील यादव

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