Site icon Dainik Savera Times

बोडो शांति समझौते से बदला असम का चेहरा, हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में आए युवा: पीएम मोदी

Bodo peace agreement transformed face of Assam

Bodo peace agreement transformed face of Assam

नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 2020 के बोडो शांति समझौते की सराहना करते हुए कहा कि इस समझौते की वजह से असम के बोडो इलाकों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि अब वहां के युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है और देश की मुख्यधारा से जुड़ गए हैं।

ये भी पढ़ें:  बांग्लादेश में हिंदू युवक की बेरहमी से हत्या, कार से कुचलकर उतारा मौत के घाट… इलाके में तनाव

कभी गोलियों की आवाज आती थी, संगीत की मधुर धुनें गूंज रही

गुवाहाटी में आयोजित पारंपरिक बोडो सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘बागुरुम्बा ड्वो 2026’ में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “जहां कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, आज वहां संगीत की मधुर धुनें गूंज रही हैं।” प्रधानमंत्री मोदी ने असम की संस्कृति की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी अन्य प्रधानमंत्री से ज्यादा बार असम का दौरा किया है। उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि असम की समृद्ध संस्कृति को दुनिया भर में पहचान मिले और इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बागुरुम्बा नृत्य बोडो समाज की जीवंत परंपरा का प्रतीक है। यह समाज की महान परंपराओं, सामाजिक सुधारों और सांस्कृतिक जागरूकता को सम्मान देने का माध्यम है। प्रधानमंत्री ने बोडो समाज के सभी महान व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि दी। भाषा और शिक्षा पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि असमिया भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है और बोडो भाषा को सहयोगी आधिकारिक भाषा बनाया गया है। इसके साथ ही बोडो भाषा में शिक्षा को मजबूत करने के लिए एक अलग निदेशालय भी स्थापित किया गया है।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (BTR), जो पहले हिंसा से प्रभावित था, अब 2020 के शांति समझौते के बाद तेजी से विकास कर रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “कभी जहां कर्फ्यू और सन्नाटा रहता था, आज वहां संगीत, नृत्य और उत्सव दिखाई दे रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ असम का नहीं, पूरे देश की उपलब्धि है।”

बोडो समझौता दशकों पुराने संघर्ष को खत्म करने में सफल रहा

पीएम मोदी ने बताया कि 2020 का बोडो शांति समझौता दशकों पुराने संघर्ष को खत्म करने में सफल रहा। इस समझौते से लोगों का भरोसा लौटा और हजारों युवाओं ने हथियार छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन को अपनाया।यह शांति समझौता 27 जनवरी 2020 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में साइन किया गया था। अमित शाह ने पिछले साल कहा था कि समझौते की सभी शर्तें तय समय में पूरी की जाएंगी।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक वाद्य यंत्र सेरजा बजाने की भी कोशिश की। उन्हें इस मौके पर सम्मानित किया गया। इस भव्य आयोजन में 10,000 से ज्यादा बोडो कलाकारों ने एक साथ बागुरुम्बा नृत्य प्रस्तुत किया। असम के 23 जिलों की 81 विधानसभा सीटों से कलाकार इस कार्यक्रम में शामिल हुए। पीएमओ के अनुसार, बागुरुम्बा नृत्य प्रकृति से प्रेरित है। यह खिलते फूलों का प्रतीक है और इंसान व प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है।

ये भी पढ़ें: ‘यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई’, BMC चुनाव नतीजों पर शिवसेना (UBT) का तीखा बयान

Exit mobile version