नेशनल डेस्क : आज हमारा देश हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है विज्ञान, तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा और यहां तक कि अंतरिक्ष में भी हम नए मुकाम हासिल कर रहे हैं। लेकिन जब तक हमारे गांव और समाज के हर वर्ग का विकास नहीं होगा, तब तक यह तरक्की अधूरी मानी जाएगी। दुख की बात यह है कि आज भी हमारे समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा जीवित है, जो ना सिर्फ बच्चों का भविष्य बर्बाद करती है बल्कि एक अच्छे समाज के निर्माण में भी बाधा बनती है। इसी बुराई को खत्म करने की दिशा में मध्य प्रदेश के भोपाल जिले के कलेक्टर, कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने एक सराहनीय पहल की है। उन्होंने “लाडो अभियान” नाम से एक विशेष अभियान शुरू किया है जिसका उद्देश्य है जिले में बाल विवाह को पूरी तरह रोकना। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
बाल विवाह रोकने के लिए कलेक्टर का बड़ा कदम
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के भोपाल जिले के कलेक्टर, कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने एक सराहनीय पहल की है। उन्होंने “लाडो अभियान” नाम से एक विशेष अभियान शुरू किया है जिसका उद्देश्य है जिले में बाल विवाह को पूरी तरह रोकना। यह अभियान खासतौर पर अक्षय तृतीया और शादी के मौसम को ध्यान में रखकर चलाया जा रहा है, क्योंकि इस समय अक्सर बाल विवाह की घटनाएं सामने आती हैं।
अभियान के तहत कड़ी सज़ा का प्रावधान
कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति, संस्था या संगठन बाल विवाह कराने में शामिल पाया जाता है, या उसमें किसी भी रूप में सहयोग करता है, तो उसके खिलाफ बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अंतर्गत दोषी को दो साल तक की जेल, एक लाख रुपये तक का जुर्माना, या फिर दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं।
आयोजकों से लिया जाएगा शपथ पत्र
कलेक्टर ने जिले के सभी वैवाहिक आयोजनकर्ताओं से आग्रह किया है कि वे सुनिश्चित करें कि उनके आयोजनों में किसी नाबालिग की शादी न हो। इसके लिए आयोजकों को यह लिखित शपथ पत्र देना होगा कि वे केवल बालिग वर-वधू की ही शादी कराएंगे। यह शपथ पत्र उन्हें कलेक्टर कार्यालय या महिला एवं बाल विकास कार्यालय में जमा करना होगा।
शादी के कार्ड में उम्र का उल्लेख अनिवार्य
प्रिंटिंग प्रेस को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिन विवाह कार्डों को छापते हैं, उनमें वर और वधू की उम्र का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। इससे यह पुष्टि हो सके कि शादी बालिगों की ही हो रही है। यह एक जरूरी कदम है जिससे बाल विवाह की रोकथाम में पारदर्शिता आ सके।
शादी से जुड़ी सेवाओं पर भी नज़र
कलेक्टर ने शादी से जुड़ी सेवाएं देने वाले लोगों जैसे कि हलवाई, बैंड वाले, कैटरर्स, घोड़ी वाले, ट्रांसपोर्ट सेवा देने वालों से भी अपील की है कि वे शादी से पहले लड़के-लड़की की उम्र के प्रमाणपत्र जांच लें। अगर बिना जांच के सेवाएं दी जाती हैं और वह शादी बाल विवाह साबित होती है, तो उन्हें भी आरोपी माना जाएगा।
सामाजिक भागीदारी से ही खत्म होगी यह कुप्रथा
यह अभियान तभी सफल हो सकता है जब समाज का हर व्यक्ति, संस्था और समुदाय इसमें प्रशासन का सहयोग करे। धर्मगुरुओं, समाज के मुखियाओं और आम जनता से अपील की गई है कि वे बाल विवाह को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं। यही समय है जब हम मिलकर एक मजबूत, शिक्षित और सुरक्षित समाज का निर्माण करें।

