
बागडोगरा (पश्चिम बंगाल): रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के बागडोगरा में तैनात सैनिकों से मुलाकात की और उन्हें संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले स्थानीय लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सैनिकों का स्थानीय लोगों के साथ व्यवहार सेना की छवि को मजबूत बनाता है। अगर जवान जनता के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखते हैं, तो दुश्मन की साजिशों को कमजोर करना आसान हो जाता है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी केवल देश की सुरक्षा करना ही नहीं, बल्कि वहां रहने वाले लोगों का विश्वास जीतना भी है। सैनिकों का पहनावा, बातचीत करने का तरीका, अनुशासन और व्यवहार स्थानीय लोगों के मन में सेना की छवि बनाते हैं। उन्होंने कहा, “आप स्थानीय लोगों से जितना ज्यादा जुड़ेंगे, दुश्मन की साजिशें उतनी ही कमजोर होती जाएंगी।” उन्होंने जवानों से अपील की कि वे लोगों के साथ अपने अच्छे रिश्तों और भरोसे को हमेशा बनाए रखें।
बागडोगरा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाके में स्थित है। यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास है, जिसे ‘चिकन्स नेक’ यानी मुर्गे की गर्दन भी कहा जाता है। यह पश्चिम बंगाल का एक संकरा भू-भाग है, जो देश के मुख्य हिस्से को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है। इस क्षेत्र का सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्व है, क्योंकि इसके आसपास चीन, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हैं। ऐसे संवेदनशील इलाके में सेना और स्थानीय लोगों के बीच भरोसा और सहयोग बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए रक्षा मंत्री ने जवानों को जनता के साथ बेहतर तालमेल बनाने की सलाह दी।
राजनाथ सिंह ने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि सेना में आधुनिक तकनीक और हथियारों का महत्व जरूर है, लेकिन सैनिकों के अंदर अनुशासन और साहस होना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर सैनिकों में अनुशासन और हिम्मत नहीं है, तो अत्याधुनिक तकनीक भी ज्यादा काम नहीं आएगी।
रक्षा मंत्री के मुताबिक, अनुशासन ही एक सामान्य सैनिक को असाधारण योद्धा बनाता है। भारतीय सेना अपनी अनुशासित कार्यशैली के लिए जानी जाती है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने जवानों से कहा कि उन्हें हर परिस्थिति में अपने अनुशासन और संयम को बनाए रखना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने सैनिकों के मनोबल को भी सेना की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए जवानों का आत्मविश्वास और हौसला मजबूत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सैनिकों को यह भरोसा होता है कि उनका देश और नेतृत्व उनके साथ खड़ा है, तो उनका मनोबल और बढ़ता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि ऊंचे मनोबल के दम पर सैनिकों की छोटी टीम भी बड़ी चुनौती का सामना कर सकती है और जीत हासिल कर सकती है।
बदलते समय के साथ युद्ध लड़ने के तरीकों में भी तेजी से बदलाव हो रहा है। इसी को देखते हुए राजनाथ सिंह ने सेना को आधुनिक तकनीक से लैस करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आज सैनिकों को ड्रोन चलाने, साइबर सुरक्षा समझने और नई तकनीकों के जरिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों को पहले से ज्यादा तकनीक पर निर्भर और आधुनिक बनाना होगा। रक्षा मंत्री ने भरोसा जताया कि सैनिकों के सहयोग से भारतीय सेना तकनीकी क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ेगी।
राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देश के स्टार्टअप और निजी उद्योग अब सेना के लिए आधुनिक उपकरण तैयार कर रहे हैं। इनमें ड्रोन, दुश्मन के ड्रोन को रोकने वाले एंटी-ड्रोन सिस्टम और सैनिकों के इस्तेमाल के लिए आधुनिक उपकरण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि भारतीय सैनिक देश में तैयार की गई तकनीक को अपनाने में आगे हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार, उद्योग और सेना मिलकर काम कर रहे हैं। इससे न केवल सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि देश की सुरक्षा जरूरतों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम होगी। कुल मिलाकर, राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में तीन प्रमुख बातों पर जोर दिया- स्थानीय लोगों का विश्वास जीतना, सैनिकों का अनुशासन और मनोबल मजबूत रखना और आधुनिक तकनीक के जरिए भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना।
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