दावोस: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान अपनी नई पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को औपचारिक रूप से शुरू किया। इस मौके पर उन्होंने इसके चार्टर (संविधान) पर हस्ताक्षर किए। ट्रंप ने इसे वैश्विक स्तर पर युद्ध और संघर्ष खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। ट्रंप ने इस दिन को “बहुत रोमांचक” बताते हुए कहा कि इसकी तैयारी लंबे समय से चल रही थी। उन्होंने कहा, “दुनिया में शांति होगी” और मजाकिया अंदाज में जोड़ा, “और हम सब इसमें स्टार हैं।”
दुनिया भर में कई खतरे अब शांत हो रहे
अपने शुरुआती भाषण में ट्रंप ने कहा कि एक साल पहले दुनिया कई जगहों पर गंभीर संकट में थी, लेकिन अब हालात बेहतर हो रहे हैं। उनके अनुसार, दुनिया भर में कई खतरे अब शांत हो रहे हैं और सकारात्मक बदलाव दिख रहे हैं। इस कार्यक्रम में कई संस्थापक सदस्य देशों के नेता मौजूद थे। ट्रंप ने दावा किया कि उनका प्रशासन इस समय आठ अलग-अलग युद्धों और संघर्षों को सुलझाने पर काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में “काफी प्रगति” हुई है।
35 देशों ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने की सहमति दी
नेताओं को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि वे सभी की मौजूदगी से सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा कि कुछ नेता बहुत लोकप्रिय हैं और कुछ कम, लेकिन “इस समूह में मुझे हर कोई पसंद है।” ट्रंप पहले ही इस संगठन को “अब तक का सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड” बता चुके हैं। यह पहल शुरू में उनकी 20-सूत्रीय गाजा युद्धविराम योजना से जुड़ी थी, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन मिला था। बाद में इसका दायरा बढ़ा दिया गया।
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, करीब 35 देशों ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने की सहमति दी है, जबकि 60 देशों को इसमें शामिल होने का न्योता दिया गया था। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में यह संगठन कुछ ऐसे काम कर सकता है जो अभी संयुक्त राष्ट्र करता है।
पुतिन के शामिल होने पर क्या बोले ट्रंप?
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सिसी के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि कई देश इस बोर्ड में शामिल होना चाहते हैं। कुछ देशों को पहले अपनी संसद से मंजूरी लेनी होगी, जबकि कुछ ऐसे देश भी हैं जिन्हें न्योता नहीं मिला, फिर भी वे सदस्य बनना चाहते हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को शामिल किए जाने पर उठी आपत्तियों का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा कि वे हर उस व्यक्ति को शामिल करना चाहते हैं जो ताकतवर है और “काम पूरा कर सकता है।”
हालांकि, कई यूरोपीय देशों ने इस पहल में शामिल होने से इनकार कर दिया है। उनकी चिंता यह है कि बोर्ड का बढ़ता प्रभाव मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकता है। ब्रिटेन ने भी चार्टर पर हस्ताक्षर नहीं किए। ब्रिटिश विदेश सचिव यवेट कूपर ने पुतिन को दिए गए निमंत्रण पर आपत्ति जताई।
स्थायी सदस्य बनने के लिए 1 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चार्टर में यह प्रावधान है कि स्थायी सदस्य बनने के लिए देशों को 1 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देना होगा। जो देश यह राशि नहीं देंगे, उनकी सदस्यता केवल तीन साल के लिए होगी। चार्टर में यह भी लिखा है कि ट्रंप राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी बोर्ड के स्थायी अध्यक्ष बने रहेंगे। ट्रंप ने कहा कि इस पहल ने ईरान से जुड़े उनके रुख और इजराइल-हमास युद्धविराम में भी भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, अगर यह प्रयास न होता तो शांति की कोई संभावना नहीं थी।
इसी बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की भी गुरुवार को दावोस पहुंचे। ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि दोनों देश अब ऐसे मोड़ पर हैं जहां समझौता हो सकता है। उन्होंने कहा, “अगर वे समझौता नहीं करते, तो यह उनकी बड़ी गलती होगी।”

