नेशनल डेस्क: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान एक अजीब घटना सामने आई है। भोजपुर जिले के मिंटू पासवान, जिन्हें चुनाव आयोग ने मृत घोषित कर दिया था, गुरुवार को पटना में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर पहुंचे और खुद को जिंदा बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने उनका नाम मृत लोगों की सूची में डाल दिया है, जबकि वह पूरी तरह से जिंदा हैं।
मिंटू पासवान ने बताया कि एसआईआर के दौरान उनके घर पर बूथ लेवल अधिकारी (BLO) नहीं आए थे, जिस कारण उनका नाम मृतकों में डाल दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने उन्हें एक नया पंजीकरण करने के लिए कहा, हालांकि वह पहले से ही वोटर थे और मतदान कर चुके थे। मिंटू के साथ सीपीआई माले पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था, जिन्होंने इसे एक बड़ी गलती बताया।
माले पार्टी के सचिव कुणाल ने कहा कि इस तरह की गलतियों के कारण उनकी पार्टी एसआईआर का विरोध कर रही है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग ने मिंटू पासवान से फॉर्म 6 भरवाने के लिए कहा, जबकि वह पहले से ही वोटर थे। वे यह भी कहते हैं कि संबंधित BLO ने यह माना है कि मिंटू का नाम गलती से हटा दिया गया था, लेकिन वोटर लिस्ट में उस मृत व्यक्ति का नाम होना चाहिए, जिसकी जगह मिंटू का नाम काटा गया था।
कुणाल ने कहा कि अब तक उन्होंने 21 ऐसे लोगों की पहचान की है, जिन्हें गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया और उनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। इनमें से 10 लोगों को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जा चुका है। उनका कहना है कि वे और लोगों की मदद करेंगे ताकि उनका नाम भी वोटर लिस्ट में सही तरीके से जोड़ा जा सके। यह मामला चुनाव आयोग की गलती को उजागर करता है, जो वोटर लिस्ट में सुधार करते समय ऐसी समस्याएं उत्पन्न कर रही हैं।
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